उदयपुर, 15 अक्टूबर (Udaipur Kiran News). मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (एमएलएसयू) में फर्जी शैक्षणिक अनुभव के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में प्रोफेसर डॉ. महेंद्र सिंह ढाका के खिलाफ आखिरकार पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. यह कार्रवाई प्रतापनगर थाने में करीब दो साल की देरी से की गई.

राज्यपाल के निर्देश के बाद हुई FIR दर्ज
विश्वविद्यालय प्रशासन ने जुलाई 2023 में ही प्रो. ढाका के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन उस समय पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. हाल ही में जब राज्यपाल का उदयपुर दौरा हुआ, तब यह मामला दोबारा उठाया गया. राज्यपाल को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद उनके निर्देश पर पुलिस हरकत में आई और एफआईआर दर्ज की गई. प्रतापनगर थानाधिकारी राजेंद्र चारण से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल और संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया.
फर्जी दस्तावेजों से सह-आचार्य पद पर नियुक्ति
एफआईआर के अनुसार, वर्ष 2010 में भौतिकी विभाग के सह आचार्य पद की भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रो. ढाका ने अपनी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव से संबंधित झूठा शपथपत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत किया था. 17 मार्च 2012 को उन्होंने सह आचार्य पद का कार्यभार संभाला. लेकिन बाद में शिकायत मिलने पर राजभवन ने 12 अप्रैल 2022 को जांच के आदेश दिए. जांच समिति ने पाया कि प्रो. ढाका ने 1 नवंबर 2007 को जो शैक्षणिक अनुभव और नियुक्ति दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, उनमें सत्यता छिपाई गई और धोखाधड़ी से जानकारी दी गई.
जांच समिति ने FIR की सिफारिश की थी
समिति की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि प्रो. ढाका ने गलत दस्तावेजों का उपयोग कर नौकरी प्राप्त की थी. रिपोर्ट के आधार पर समिति ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी, लेकिन उस पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई.
दो साल की देरी से दर्ज हुआ मामला
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 6 और 7 जुलाई 2023 को प्रतापनगर थाने में शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. बाद में जब कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा से जुड़ा विवाद सुर्खियों में आया, तब यह मामला दोबारा चर्चा में आया. बताया जा रहा है कि प्रो. ढाका, वीसी सुनीता मिश्रा के करीबी माने जाते हैं, जिसकी वजह से एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई. करीब एक माह पहले रजिस्ट्रार वीसी गर्ग ने भी एफआईआर दर्ज करवाने का आवेदन दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद अंततः पुलिस ने प्रो. ढाका के खिलाफ मामला दर्ज किया है.