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Saturday, 31 October 2026
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एकादशी उपवास से आंतरिक कमजोरियों पर विजय पाने का संकल्प लें: प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर, सितंबर 7: उपवास केवल भोजन का त्याग करना नहीं है, बल्कि उन कमजोरियों को छोड़ने का संकल्प लेना है जो व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से कमजोर बनाती हैं। एकादशी आत्म-नियंत्रण और आत्म-शुद्धि का एक अवसर प्रदान करती है। नारायण सेवा संस्थान के ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में बोलते हुए, संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने एकादशी से जुड़े पौराणिक कथाओं के माध्यम से जीवन को सरल, अनुशासित और अर्थपूर्ण बनाने के संदेश साझा किए।

अग्रवाल ने राक्षस मुरा और एकादशी देवी की कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कहानी लोगों को न केवल बाहरी दुश्मनों पर विजय पाने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि मन में छिपी हुई क्रोध, अहंकार और नकारात्मकता को भी दूर करने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने महर्षि मेधा की कहानी का उल्लेख करते हुए क्रोध पर नियंत्रण की महत्ता को उजागर किया और उपस्थित लोगों से क्रोधित न होने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

सिद्धांतों पर दृढ़ रहें

राजा रुक्मंगद और मोहिनी की कहानी का उल्लेख करते हुए, अग्रवाल ने अपने सिद्धांतों पर दृढ़ रहने के महत्व को बताया और लोगों को बिना पूरी सोच-विचार किए वादे न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के बावजूद, व्यक्ति को अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए और निरंतर आत्म-सुधार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

335 दिव्यांगजन को मिले कृत्रिम अंग

प्रशांत अग्रवाल ने अहमदाबाद में आयोजित नारायण मॉड्यूलर आर्टिफिशियल लिम्ब फिटमेंट कैंप का भी उल्लेख किया, जहां 335 दिव्यांगजन को कृत्रिम अंग मिले, साथ ही एक नई आशा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने का अवसर मिला।

उन्होंने सेवा पहल के लिए कैंप और लाइव कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि इस ‘सेवा के यज्ञ’ में हर योगदान किसी के जीवन में नई रोशनी ला सकता है।

एकादशी और आत्म-नियंत्रण

अग्रवाल ने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, एकादशी पांच इंद्रियों, पांच कर्मों के अंगों और मन पर नियंत्रण स्थापित करने से जुड़ी है — जो मानव कार्यों के 11 पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसलिए, उन्होंने कहा, एकादशी का असली अर्थ केवल एक दिन के लिए भोजन से दूर रहना नहीं है, बल्कि अपने बोलने, सोचने, क्रोध, इच्छाओं और कार्यों पर नियंत्रण रखना है, जबकि सेवा, परोपकार और अच्छे आचरण को जीवन का हिस्सा बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रयास हमेशा अपने आप को बदलने की दिशा में होना चाहिए, क्योंकि असली सुधार अंदर से शुरू होता है।

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