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Friday, 30 October 2026
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दिल्ली सरकार ने जनकपुरी स्कूल को सुरक्षा उल्लंघनों पर नोटिस जारी किया

नई दिल्ली, 20 जुलाई: दिल्ली सरकार ने जनकपुरी में स्थित एक निजी स्कूल के प्रबंधन को गंभीर सुरक्षा उल्लंघनों, अवैध शाखाओं के संचालन और महत्वपूर्ण वित्तीय अनियमितताओं के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किया है।

एक अधिकारी ने बताया कि शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा निदेशालय को स्कूल के प्रबंधन और उसके नेतृत्व के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। स्कूल को जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है। यदि कोई जवाब नहीं मिलता है, तो तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

आशीष सूद ने जोर देकर कहा कि दिल्ली सरकार बच्चों की सुरक्षा और गरिमा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा, “एक स्कूल माता-पिता की भूमिका में कार्य करता है। इसके पास अपने परिसर में उपस्थित प्रत्येक बच्चे की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी होती है। यदि कोई संस्था गंभीर अपराधों जैसे कि बाल शोषण को छुपाती है, आवासीय भवनों के बेसमेंट में अवैध शाखाएं चलाती है, और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करती है, तो हम चुप नहीं रहेंगे।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार स्कूल के प्रबंधन को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने और उसकी भूमि पट्टे को रद्द करने की सिफारिश करने के लिए तैयार है।

शिक्षा निदेशालय की विशेष समितियों द्वारा कई चरणों में की गई एक आधिकारिक जांच में स्कूल के प्रशासनिक, वित्तीय और नैतिक जिम्मेदारियों में गंभीर लापरवाही का पता चला।

बयान में यह भी कहा गया कि यौन उत्पीड़न की घटनाओं को छुपाने के प्रयास किए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, 30 अप्रैल को स्कूल के प्री-प्राइमरी विंग में एक नर्सरी छात्रा के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया।

जांच में पाया गया कि स्कूल प्रबंधन ने इस गंभीर घटना की सूचना शिक्षा निदेशालय को नहीं दी, जो कि अनिवार्य बाल संरक्षण कानूनों का उल्लंघन है।

इसके अलावा, सुरक्षा व्यवस्थाओं में खामियां भी पाई गईं। जब पुलिस प्री-प्राइमरी शाखा की जांच के लिए पहुंची, तो वहां स्थापित सभी 64 सीसीटीवी कैमरे खराब पाए गए। बयान में यह उल्लेख किया गया कि स्कूल ने जानबूझकर कैमरों के रखरखाव के लिए कोई अनुबंध नहीं रखा।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल बिना अनुमति के नारंग कॉलोनी में एक निजी आवासीय भवन से नर्सरी और किंडरगार्टन कक्षाएं अवैध रूप से चला रहा था। इसके अलावा, इस अवैध भवन के बेसमेंट का उपयोग छोटे बच्चों के लिए बिना देखरेख वाले गतिविधि क्षेत्र के रूप में किया जा रहा था।

बयान में यह भी बताया गया कि स्कूल में बाल संरक्षण नीति, बाल संरक्षण समिति और POCSO-प्रशिक्षित नोडल अधिकारी का अभाव था। इसके अलावा, सुरक्षा कर्मियों की अनिवार्य पुलिस सत्यापन भी नहीं किया गया था।

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