पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम राहत

नई दिल्ली, अगस्त 25: सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को गाज़ियाबाद के इंदिरापुरम में एक alleged road rage घटना से संबंधित FIR के मामले में अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने उपाध्याय के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है, पर रोक लगा दी है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में एक पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने आदेश दिया कि उपाध्याय के खिलाफ FIR या उसी मामले से संबंधित किसी भी भविष्य की FIR के संबंध में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिया कि इंदिरापुरम पुलिस थाने में दर्ज FIR की एक प्रति उपाध्याय को प्रदान की जाए, ताकि वे उचित कानूनी उपाय कर सकें।
कोर्ट ने गाज़ियाबाद के पुलिस कमिश्नर को अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया, और अगली सुनवाई 7 सितंबर को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि FIR की प्रति प्राप्त करने के बाद, उपाध्याय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FIR को रद्द कराने या अन्य उचित राहत के लिए आवेदन कर सकते हैं। तब तक उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई है।
उपाध्याय का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने तर्क किया कि यह मामला उनके investigative journalism के खिलाफ एक “प्रतिशोधात्मक हमला” है। उन्होंने कहा कि उपाध्याय ने राम मंदिर ट्रस्ट में alleged irregularities और उत्तर प्रदेश प्रशासन में भ्रष्टाचार से संबंधित रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसके कारण यह FIR दायर की गई।
याचिका में दावा किया गया है कि घटना के समय उपाध्याय अपनी बेटी को स्कूल से घर ले जा रहे थे। इसी दौरान, एक मोटरसाइकिल सवार ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया और हंगामा खड़ा किया। उपाध्याय ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी की उपस्थिति के कारण किसी विवाद में शामिल नहीं हुए और स्थिति को शांत करने की कोशिश की।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पूरा मामला पूर्व नियोजित था और शिकायतकर्ता को उपाध्याय की रिपोर्टिंग के प्रतिशोध में इस्तेमाल किया गया। इसमें यह भी अनुरोध किया गया कि घटना के आसपास के CCTV फुटेज को सुरक्षित रखा जाए ताकि उनकी निर्दोषता साबित हो सके।



