पीएम मोदी ने मन की बात में हर्गिला पक्षी का किया जिक्र

नई दिल्ली, 28 जून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में दुर्लभ ‘हर्गिला’ पक्षी (Greater Adjutant Stork) की प्रेरणादायक कहानी और इसके संरक्षण के प्रयासों को साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय था जब असम के कुछ हिस्सों में इस पक्षी को अशुभ माना जाता था, लेकिन लोगों की धारणाओं को बदलने के प्रयासों ने इसे कई गांवों के लिए पहचान का प्रतीक बना दिया है।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हर्गिला एक अत्यंत दुर्लभ पक्षी है जो प्रकृति को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बावजूद, इस पक्षी के बारे में भ्रांतियाँ लंबे समय तक बनी रहीं, जिससे लोग इसकी उपस्थिति को पसंद नहीं करते थे। यहां तक कि हर्गिला के घोंसले बनाने वाले पेड़ भी काट दिए गए थे।
इस दौरान, वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने स्थिति का अवलोकन किया और लोगों के मन में बदलाव लाने का संकल्प लिया। उन्होंने सबसे पहले महिलाओं के साथ संवाद किया और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समझाया कि हर्गिला पर्यावरण के लिए कितना महत्वपूर्ण है। धीरे-धीरे, महिलाएं इस अभियान में शामिल हुईं, जिससे एक महत्वपूर्ण बदलाव आया। जो पक्षी पहले गांवों से अपने अशुभ नाम के कारण दूर किया जाता था, वह अब कई लोगों के लिए गर्व और पहचान का प्रतीक बन गया है।
प्रधानमंत्री ने इस प्रयास को समाज में जागरूकता और सामूहिक भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
यह उल्लेखनीय है कि हर्गिला दुनिया के सबसे दुर्लभ और बड़े बगुलों की प्रजातियों में से एक है। इसका नाम दो संस्कृत शब्दों ‘हड’ (हड्डी) और ‘गिला’ (गटकना) से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘हड्डी-गटकने वाला पक्षी’। यह मुख्य रूप से भारत के असम और कंबोडिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है, जहां इसकी वैश्विक जनसंख्या का लगभग 80 प्रतिशत असम में निवास करता है।
हर्गिला एक मांसाहारी और शवभक्षी पक्षी है जो सड़ते मांस, मृत जानवरों और कचरे का सेवन करके प्राकृतिक सफाई करने वाले के रूप में कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, यह जल निकायों और आर्द्रभूमियों के चारों ओर पारिस्थितिकी तंत्र की सफाई और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।



