राजस्थान पुलिस ने शुरू की उमंग-VII मुहिम

जयपुर, 28 मई: राजस्थान पुलिस 1 जून से 30 जून 2026 तक बाल श्रम, बंधुआ बाल श्रम और बच्चों की मानव तस्करी के खिलाफ एक महीने तक चलने वाले विशेष अभियान “उमंग-VII” का आयोजन करेगी।
इस अभियान की शुरुआत पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर की गई है, जिसका उद्देश्य बाल श्रम और बाल तस्करी को नियंत्रित करना और बचाए गए बच्चों का पुनर्वास सुनिश्चित करना है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नागरिक अधिकार और एएचटी) हावा सिंह घुमरिया ने सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज आईजी, पुलिस के उप आयुक्तों, जिला पुलिस अधीक्षकों और अजमेर तथा जोधपुर में जीआरपी इकाइयों को अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
जिला स्तर पर अतिरिक्त एसपी रैंक के नोडल अधिकारियों को इस ऑपरेशन की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है। पुलिस मुख्यालय ने जिला पुलिस प्रमुखों को सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, बाल अधिकार विभाग, बाल कल्याण समितियों, आश्रय गृहों, बच्चों के घरों और एनजीओ के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया है।
हर जिले में पुलिस थाने के स्तर पर विशेष बचाव टीमों का गठन किया जाएगा। प्रत्येक टीम में एक एसआई या एएसआई के साथ चार पुलिसकर्मी शामिल होंगे। अभियान शुरू होने से पहले टीमों को बाल श्रम और मानव तस्करी से संबंधित मामलों में पहचान और कार्रवाई में सुधार के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग, बाल कल्याण समितियों और एनजीओ के प्रतिनिधि भी इन बचाव टीमों का हिस्सा होंगे ताकि संवेदनशील और समन्वित बचाव और पुनर्वास प्रयास सुनिश्चित किए जा सकें।
अभियान के दौरान, होटल, सड़क किनारे के खाने-पीने की जगहों, ईंट भट्टों, फैक्ट्रियों, रेलवे प्लेटफार्मों, बस स्टैंड, धार्मिक स्थलों, हाईवे ढाबों और अस्थायी बस्तियों में बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पहचाने गए बच्चों के पूर्ण विवरण, तस्वीरें और यदि आवश्यक हो तो वीडियोग्राफी एकत्र करें। यदि बच्चों को लापता या तस्करी का शिकार पाया जाता है, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बचाए गए बच्चों का चिकित्सा परीक्षण और आवश्यकतानुसार मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा। उन्हें संबंधित बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। माता-पिता और रिश्तेदारों के विवरण एकत्र करने के बाद बच्चों को उनके परिवारों से पुनः मिलाने का प्रयास किया जाएगा।
यदि बच्चों को अन्य राज्यों से लाया गया है, तो स्थानीय पुलिस थानों और संबंधित राज्यों के अधिकारियों को तुरंत सूचित किया जाएगा।
पुलिस मुख्यालय ने संगठित गिरोहों की पहचान करने और बाल श्रम और बाल तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को भी निर्देशित किया है। अधिकारियों को रात के आश्रयों और बच्चों के रहने के स्थानों का निरीक्षण करने के लिए कहा गया है ताकि संगठित नेटवर्क की संलिप्तता का पता लगाया जा सके।
मानव तस्करी से संबंधित मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 143, 144, 145, 146, 98 और 99 के तहत कार्रवाई की जाएगी। बाल न्याय अधिनियम, 2015 की धाराओं 75 और 79 और बाल श्रम निषेध अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राजस्थान पुलिस ने कहा है कि राज्य सरकार बाल श्रम, बंधुआ बाल श्रम और बाल तस्करी के खिलाफ शून्य सहिष्णुता नीति का पालन करती है, और “उमंग-VII” अभियान का उद्देश्य बच्चों को शोषण से बचाना और अपराधियों तथा संगठित गिरोहों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।



