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Thursday, 29 October 2026
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संजीवनी क्रेडिट सहकारी समिति के संस्थापक सदस्य को जमानत से किया गया वंचित

उदयपुर, 5 जून: एक अदालत ने संजीवनी क्रेडिट सहकारी समिति लिमिटेड के एक संस्थापक सदस्य की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, जो आरोपित है कि उसने निवेशकों को दो से ढाई गुना लाभ का वादा करके धोखा दिया और ₹9.83 लाख से अधिक की राशि का गबन किया।

मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, 5 नवंबर 2020 को शिव प्रसाद, मधु दाधीच, विद्या, सुशीला और मैना ने प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह, संस्थापक सदस्य नरेश सोनी, सीईओ किशन सिंह, बोर्ड सदस्य देवी सिंह, संस्थापक सदस्य शैतान सिंह और प्रबंधक महेश चंद्र लोढ़ा के खिलाफ अदालत के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपितों ने मिलकर बहु-राज्य बैंकिंग व्यवसाय के नाम पर समिति का पंजीकरण कराया और राजसमंद में एक शाखा स्थापित की। स्थानीय नागरिकों को उच्च कमीशन की पेशकश करके एजेंट नियुक्त किया गया, जबकि विभिन्न जमा योजनाओं का व्यापक प्रचार किया गया।

आगे आरोप लगाया गया कि महेश और अन्य कर्मचारियों ने निवेशकों को अधिक लाभ, बेहतर रिटर्न और जमा की गई राशि को कम समय में दो से ढाई गुना करने का वादा करके प्रेरित किया। शिकायत में कहा गया कि निवेशकों ने इन आश्वासनों के प्रभाव में आकर ₹9,83,328 की राशि निश्चित जमा में निवेश की। हालांकि, परिपक्वता अवधि के बाद, राशि और ब्याज वापस नहीं किया गया। समिति ने बाद में भुगतान से इनकार कर दिया, यह दावा करते हुए कि फंड फंस गए हैं या खो गए हैं।

जमानत याचिका आरोपी शैतान सिंह द्वारा दायर की गई थी, जो समिति के संस्थापक सदस्य उत्तम सिंह का पुत्र है और जो वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है।

सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त लोक अभियोजक वंदना उदावत ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों में 14 मामले दर्ज हैं और उसे लोगों को धोखा देने और उनकी जीवनभर की बचत का गबन करने का आरोप है।

दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद, अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश संख्या 3 मनीष कुमार वैष्णव ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया। आदेश में अदालत ने कहा कि आर्थिक अपराध समाज के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं।

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