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Thursday, 29 October 2026
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संसाधनों से नहीं, सही दृष्टिकोण से मिलती है सफलता: प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर, 10 सितंबर: नारायण सेवा संस्थान में चल रहे ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम में संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने भगवान गणेश से जुड़े प्रेरणादायक किस्सों के माध्यम से ज्ञान, विनम्रता, माता-पिता के प्रति सम्मान और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल संसाधनों या क्षमताओं से नहीं, बल्कि सही दृष्टिकोण और ज्ञान से मिलती है।

भगवान गणेश और कार्तिकेय की पृथ्वी के चारों ओर यात्रा की कहानी सुनाते हुए प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि दोनों भाइयों को पहले पूजा जाने के लिए पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाने की शर्त दी गई थी।

कार्तिकेय अपने मोर पर पृथ्वी का चक्कर लगाने निकले, जबकि भगवान गणेश ने स्थिति को समझा और अपने माता-पिता को अपनी पूरी दुनिया मानते हुए उनके चारों ओर सात चक्कर लगाए। उनका तर्क था कि माता-पिता ही जीवन का आधार हैं। उनकी बुद्धिमत्ता से प्रभावित होकर भगवान शिव ने गणेश को पहले पूजा जाने का दर्जा दिया।

प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि इस घटना से मिलने वाला पाठ आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर समाधान की खोज में दूर-दूर तक भटकते हैं, जबकि उन्हें जो उत्तर चाहिए, वह पहले से ही उनके सामने हो सकता है।

माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा तीर्थ यात्रा बताते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था तब ही सार्थक होती है जब इसका प्रभाव हमारे व्यवहार और सेवा की भावना में दिखाई दे।

भगवान गणेश और तुलसी के बीच की घटना के माध्यम से उन्होंने ‘नहीं’ कहने का सही तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश ने विनम्रता से तुलसी के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसके बाद तुलसी ने उन्हें श्राप दिया। प्रतिशोध लेने के बजाय, भगवान गणेश ने श्राप को स्वीकार किया और तुलसी को एक वरदान भी दिया।

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव को ठुकराने में कुछ गलत नहीं है, लेकिन अस्वीकार करने का तरीका दूसरे व्यक्ति की गरिमा और सम्मान को बनाए रखना चाहिए।

कार्यक्रम में दिव्यांगजन और उनके परिवार के सदस्य जो पूरे भारत से उपचार के लिए आए थे, उपस्थित थे।

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