बांसवाड़ा, 18 अगस्त (Udaipur Kiran). Rajasthan के बांसवाड़ा जिले की धरती अब सोने का गढ़ बनने जा रही है. घाटोल क्षेत्र में जगपुरा और भूकिया के बाद अब कांकरिया में भी स्वर्ण अयस्क के संकेत मिले हैं, जिससे यह इलाका तीसरे ब्लॉक के रूप में सामने आया है. लगभग 3 वर्ग किमी क्षेत्र में सोने की मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद खनिज विभाग ने यहां अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) के लिए टेंडर भी जारी किए थे, हालांकि तकनीकी कारणों से इन्हें फिलहाल निरस्त कर दिया गया है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही नए सिरे से टेंडर जारी किए जाएंगे और यहां खनन की राह खुल सकेगी.

एक्सप्लोरेशन प्रक्रिया क्या है?
खनन से पहले अयस्क की वास्तविक स्थिति जानने के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, मिट्टी-पानी-चट्टानों के नमूनों की जांच, उपग्रह व हवाई चित्रों से अध्ययन और जमीन में ड्रिलिंग कर कोर सैंपल निकालना शामिल है. इन परीक्षणों से खनिज की मात्रा, गुणवत्ता और गहराई का सटीक अनुमान लगाया जाता है.
माइनिंग लाइसेंस का इंतजार
जिले में स्वर्ण भंडार की खोज 1990-91 में हुई थी. जगपुरा-भूकिया क्षेत्र में लगभग 10 वर्ग किमी में स्वर्ण भंडार पाया गया, जिसके बाद सरकार ने यहां खनन लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. एक टन अयस्क में 1.945 ग्राम सोना मिलने का अनुमान है और कुल 120 टन सोना उपलब्ध होने की संभावना है, जिससे हजारों करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित हो सकता है. चयनित फर्म ने लाइसेंस के लिए सरकार को 170 करोड़ रुपए जमा करा दिए हैं और अब माइनिंग लाइसेंस मिलने का इंतजार है.
आदिवासी क्षेत्र के लिए वरदान
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वर्ण खनन परियोजना आदिवासी क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी. सोने की इन खदानों से न केवल सरकारी खजाने में बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. खनन से जुड़ी कंपनियां और सहायक उद्योगों के आने से पूरे क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, Rajasthan जल्द ही कर्नाटक और Andhra Pradesh के बाद भारत का प्रमुख सोना उत्पादक राज्य बन सकता है.