लाहौर (Punjab), पाकिस्तान, 27 अगस्त (Udaipur Kiran). पाकिस्तान के Punjab प्रांत के छह जिलों में नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति बन गई है. Punjab सरकार ने तटीय क्षेत्रों के गांवों को खाली कराने के साथ ही बचाव और राहत कार्यों के लिए सेना को बुलाया है. प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (PDMA) के मुताबिक, मंगलवार देर रात भारत द्वारा रावी नदी पर स्थित थीन बांध के सभी गेट खोल दिए गए, जिससे चिनाब नदी भी उफान पर है और इसके निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं.

‘डान’ अखबार के अनुसार, बुधवार आधी रात के बाद हेड मराला में चिनाब और हेड जस्सर में रावी नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई. इससे संबंधित इलाकों में बाढ़ आ गई. चिनाब पर स्थित हेड खानकी और हेड कादिराबाद भी अगले 24 घंटों में खतरे के स्तर को पार कर सकते हैं. अधिकारियों को रावी नदी से भारी नुकसान की आशंका है. लाहौर और कसूर समेत कई जिलों में आपात स्थिति बनी हुई है.
कसूर में 72 गांवों और करीब 45,000 निवासियों पर बाढ़ का असर पड़ा है. वहीं, पाकपट्टन, वेहारी, बहावलनगर और बहावलपुर के सतलुज बेसिन क्षेत्रों में भी हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. अधिकारियों ने बताया कि 14,000 नागरिकों और 17,000 पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. PDMA ने 130 नावें, 115 आउटबोर्ड मोटर, 500 बचावकर्मी, 1,300 लाइफ जैकेट और 1,600 टेंट तैनात किए हैं. रेस्क्यू 1122 ने कसूर, ओकारा, पाकपट्टन, बहावलनगर और वेहारी से 28,055 लोगों को सुरक्षित निकाला है. PDMA के महानिदेशक इरफान अली काठिया ने नदी-तल और नालों, विशेषकर देग नाले की तत्काल सफाई के निर्देश दिए हैं.
इसी दौरान राहत आयुक्त नबील जावेद ने मुर्री और गलियत क्षेत्रों में भूस्खलन की चेतावनी दी है. Punjab गृह विभाग के अनुसार, लाहौर, फैसलाबाद, कसूर, सियालकोट, नरोवाल और ओकारा जिलों में जिला प्रशासन की मदद के लिए सेना तैनात की गई है. वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल इनाम हैदर मलिक ने बताया कि पाकिस्तान के 7,500 ग्लेशियरों में से करीब 45 प्रतिशत तेजी से पिघल रहे हैं. इस साल की भीषण बाढ़ मुख्य रूप से ग्लेशियर पिघलने की वजह से आई है. मौजूदा मानसून के 10 सितंबर तक बने रहने की संभावना है, जिसने अब तक पूरे देश में लगभग 800 लोगों की जान ले ली है.