उदयपुर, 09 सितम्बर (Udaipur Kiran News). भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार इस वर्ष को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मना रही है. इसी कड़ी में उदयपुर नगर निगम टाउन हॉल परिसर में 17 से 19 सितम्बर तक नेशनल ट्राईबल फूड फेस्टिवल – 2025 आयोजित किया जाएगा. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान के तत्वावधान में होने वाले इस आयोजन में देशभर से 100 पाक कलाकार भाग लेंगे. खास बात यह है कि फेस्टिवल में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा.

विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजन होंगे आकर्षण का केंद्र
टीआरआई निदेशक ओ.पी. जैन ने बताया कि इस फूड फेस्टिवल में अलग-अलग राज्यों की जनजातियों के पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे.
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Maharashtra से महादेव कोली जनजाति के मासवड़ी, डांगर भाकरी, कड़क माकरी.
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केरल से कुरूलिया और माविलन जनजाति के मुलायरी पायसम, रागी पजन्पुरी.
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मध्यप्रदेश से बारेला, बेगा और मलासी जनजाति के लाल ज्वारी के लड्डू, जंगली मौसंबी भाजी, कुटकी भात.
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जम्मू-कश्मीर से गुज्जर जनजाति का कद्दू खीर और कुंगी मुकुम.
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Bihar से निरमाला जनजाति के रागी और राइस लड्डू.
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दादरा-नगर हवेली से मांडोनी जनजाति के बेम्बू अचार, नागली रोटी.
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Chhattisgarh से हालना और मुरीया जनजाति की मंडिया रोटी, आमल और चापड़ा चटनी.
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Gujarat से घोड़िया जनजाति के नागली से बने व्यंजन.
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Rajasthan से भील, मीणा, गरासिया और सहरिया जनजातियों के कुलध की घूघरी, मक्के का खींचड़ा, महुआ के ढेकले, बाजरी का सोगरा, केर-सांगरी (पंचकुटा) समेत कई पारंपरिक व्यंजन शामिल होंगे.
फेस्टिवल में पारंपरिक व्यंजन स्टॉल्स के साथ-साथ ऑर्गेनिक उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगेगी.
सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय उद्यमिता को मिलेगा बल
यह फूड फेस्टिवल भारत की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर लाने के साथ ही वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बढ़ावा देगा. पाक कलाकार एक-दूसरे से व्यंजनों की तकनीक साझा करेंगे, जिससे विभिन्न राज्यों की भोजन शैलियों का आदान-प्रदान होगा.
इसके अलावा, यह आयोजन पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा. लोग एक ही स्थान पर देशभर के जनजातीय व्यंजनों का स्वाद ले सकेंगे. साथ ही, फूड ब्लॉगर, शोधकर्ताओं और खाद्य उद्यमियों के लिए भी यह आयोजन उपयोगी साबित होगा.