छत्तीसगढ़ सरकार की मत्स्य नीति के खिलाफ आदिवासी मछुआरों का प्रदर्शन

Chhattisgarh सरकार की मत्स्य नीति के खिलाफ आदिवासी मछुआरों का प्रदर्शन
Chhattisgarh सरकार की मत्स्य नीति के खिलाफ आदिवासी मछुआरों का प्रदर्शन

कोरबा, 4 अक्टूबर (Udaipur Kiran News) .हसदेव जलाशय में Chhattisgarh सरकार की मत्स्य नीति 2022 के खिलाफ Saturday को आदिवासी मछुआरा संघ (हसदेव जलाशय) कोरबा के बैनर तले बड़ी संख्या में मछुआरे एकत्र हुए. इस दौरान नाव रैली निकालकर सरकार द्वारा जारी निविदा को रद्द करने और बांगो बांध प्रभावित परिवारों को मत्स्य पालन का अधिकार दिए जाने की मांग की गई.इस आंदोलन में Chhattisgarh किसान सभा ने भी समर्थन दिया और चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा.

1980 में विस्थापित हुए थे 58 गाँव

किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि 1980 के दशक में बांगो बांध बनने से 58 आदिवासी बहुल गांव डूब क्षेत्र में समा गए. विस्थापितों को मुआवजा और पुनर्वास के साथ यह आश्वासन भी मिला था कि उन्हें बांध क्षेत्र में मत्स्य पालन का अधिकार दिया जाएगा. शुरुआत में कुछ वर्षों तक विस्थापित परिवार रॉयल्टी आधार पर मछली पालन करते रहे, लेकिन बाद में सरकार ने बांध को ठेके पर देना शुरू कर दिया. इससे स्थानीय विस्थापित अपने ही जलाशय में मजदूर बनकर रह गए.

ठेका प्रथा का विरोध

आदिवासी मछुआरा संघ के फिरतू बिंझवार ने कहा कि 2003 और 2022 की मत्स्य नीति में बड़ी जलाशयों को ठेके पर देने की व्यवस्था को बनाए रखा गया है. मत्स्य महासंघ द्वारा हर दस साल पर निजी ठेकेदारों को बांध सौंपा जाता रहा है. ग्राम केंदई के रामबली और धजाक के अथनस तिर्की ने बताया कि 2015 में दिया गया ठेका जून 2025 में खत्म हुआ है, लेकिन इसके बावजूद फिर से 10 साल की लीज हेतु निविदा जारी कर दी गई है, जिसकी अंतिम तिथि 8 अक्टूबर है. मछुआरों ने ऐलान किया कि वे ठेकेदार के लिए काम नहीं करेंगे और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे.

जनसंघर्ष संगठनों का समर्थन

हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति से जुड़े रामलाल करियाम और मुनेश्वर पोरते ने मछुआरों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदेश में जल, जंगल और जमीन से आदिवासियों को लगातार बेदखल किया जा रहा है. इसी तरह Chhattisgarh किसान सभा के दीपक साहू ने भी खनन परियोजनाओं से विस्थापितों की समस्याओं को उठाते हुए हसदेव जलाशय के निजीकरण का विरोध किया.आंदोलन के अंत में नाव रैली निकालकर मछुआरा संघ ने घोषणा की कि 6 अक्टूबर को पोड़ी एसडीएम कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा जाएगा.

(Udaipur Kiran) / हरीश तिवारी

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