झालावाड़ पुलिस का ‘ऑपरेशन शटरडाउन’: सरकारी योजनाओं में ₹3 करोड़ की सेंधमारी का भंडाफोड़, 30 आरोपी गिरफ्तार

जयपुर, 23 अक्टूबर (Udaipur Kiran News). सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का झालावाड़ पुलिस ने खुलासा किया है. Superintendent of Police अमित कुमार के नेतृत्व में चलाए गए ‘ऑपरेशन शटरडाउन’ के तहत इस गिरोह का पर्दाफाश किया गया. पुलिस ने 70 घंटे चले इस मेगा ऑपरेशन में गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

ऑपरेशन शटरडाउन

पुलिस ने बताया कि यह पहली बार है जब केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं — पीएम किसान सम्मान निधि, पेंशन, मुआवजा और अन्य लोककल्याण योजनाओं में इतनी बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है.

70 पुलिस टीमों की 70 घंटे की कार्रवाई

एसपी अमित कुमार के निर्देशन में 70 पुलिस टीमों ने लगातार 70 घंटे तक 600 किलोमीटर क्षेत्र में फैले 30 ठिकानों पर एकसाथ छापेमारी की. इस दौरान दौसा, जयपुर ग्रामीण और Madhya Pradesh तक फैले नेटवर्क के 30 सदस्य गिरफ्तार किए गए.

फ्रॉड का तरीका: 75% तक कमीशन में सरकारी पैसा हड़पना

गिरोह का सरगना रामावतार सैनी (दौसा निवासी) सरकारी पोर्टलों जैसे DMIS की तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर अपात्र लोगों के नाम पर सरकारी सहायता राशि ट्रांसफर करवाता था. इसके लिए वह आम लोगों के बैंक अकाउंट और पहचान दस्तावेज खरीदता, और सिस्टम से लाखों रुपये की राशि ट्रांसफर कर 50% से 75% कमीशन अपने और एजेंटों के बीच बांटता था.

कैसे खुला घोटाला

8 अगस्त को झालावाड़ पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि कामखेड़ा क्षेत्र में आसिक अली नामक व्यक्ति सरकारी योजना में हेराफेरी कर रहा है. एसपी अमित कुमार ने साइबर थाना टीम को जांच सौंपी.

  • तकनीकी जांच: कांस्टेबल रवि सेन और सुमित कुमार ने आसिक अली के मोबाइल से लिंक बैंक खातों और संदिग्ध ट्रांजैक्शनों की गहराई से जांच की.

  • रैकेट का नेटवर्क: जांच में पता चला कि यह कोई अकेले व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि अपात्र खाताधारकों को सरकारी पैसा दिलाने वाला संगठित गिरोह है.

  • मास्टरमाइंड तक पहुंच: तकनीकी और वित्तीय डाटा विश्लेषण से रामावतार सैनी (बांदीकुई, दौसा) को इस रैकेट का मुखिया पाया गया.

  • ऑपरेशन शटरडाउन: आरोपियों के भागने या सबूत नष्ट करने से पहले 70 टीमों ने तीन राज्यों में एकसाथ रेड कर गिरोह का भंडाफोड़ किया.

जप्ती और बरामदगी

ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कुल ₹3 करोड़ मूल्य की संपत्ति जब्त की, जिसमें शामिल हैं:

  • नकद राशि – ₹52.69 लाख

  • लग्जरी वाहन/ट्रैक्टर/बाइक – 31

  • लैपटॉप/कंप्यूटर – 35, प्रिंटर – 16

  • एटीएम कार्ड – 430, सिम कार्ड – 193

  • बैंक पासबुक – 207, पैन कार्ड – 29

  • पहचान पत्र – 560, चेकबुक – 96

  • फिंगर स्कैनर – 19, नोट गिनने की मशीन – 1

गिरफ्तार आरोपी (ज़िलेवार)

  • दौसा (4 आरोपी): रामावतार सैनी, राजुलाल सैनी, रोहिताश सैनी, चेतराम सैनी.

  • झालावाड़ (24 आरोपी): परमानंद मीणा, धनराज मीणा, महावीर कलाल, आशिक अली सहित अन्य.

  • जयपुर ग्रामीण व मध्यप्रदेश (2 आरोपी): वासुदेव पारीक (जयपुर ग्रामीण) और विठ्ठल तंवर (राजगढ़, एमपी).

एसपी अमित कुमार का बयान

“यह केस साबित करता है कि अपराध कितना भी संगठित क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता. हमारी प्राथमिकता है कि इन आरोपियों को कानूनी रूप से कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई सरकारी योजना में सेंध लगाने की हिम्मत न करे.”

एसपी ने साइबर टीम के कांस्टेबल रवि सेन और सुमित कुमार को उत्कृष्ट कार्य के लिए सराहा और उस गुमनाम मुखबिर का आभार जताया जिसने इस घोटाले का पर्दाफाश करवाया.