
कोलकाता, 24 दिसंबर (Udaipur Kiran) . कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु ने सेवानिवृत्ति से पहले होने वाले पारंपरिक विदाई समारोह में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है. वह 3 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. न्यायमूर्ति के करीबी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला गहरी नाराजगी और आहत भावनाओं के चलते लिया गया है. इस संबंध में उन्होंने उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अपने निर्णय की जानकारी भी दे दी है.
परंपरा के अनुसार, किसी भी न्यायाधीश के सेवानिवृत्त होने से पहले उच्च न्यायालय में ‘फुल कोर्ट’ आयोजित किया जाता है. इसमें मुख्य न्यायाधीश सहित सभी न्यायाधीश मौजूद रहते हैं. इसके साथ ही उच्च न्यायालय की तीन प्रमुख वकील संस्थाओं की ओर से विदाई समारोह का आयोजन होता है, जिसमें बार एसोसिएशन, बार लाइब्रेरी और इनकॉरपोरेट लॉ सोसाइटी शामिल होती हैं.
बताया जा रहा है कि न्यायमूर्ति बसु के इस निर्णय की पृष्ठभूमि जुलाई महीने की एक घटना से जुड़ी है. उस समय उच्च प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति से जुड़े एक मामले में अदालत की टिप्पणी से नाराज कुछ नौकरी अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय परिसर में प्रदर्शन किया था. प्रदर्शन के दौरान न्यायमूर्ति की तस्वीर को पैरों से कुचला गया और उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं. उस घटना की तस्वीरें समाचार माध्यमों में सामने आने के बावजूद वकीलों के किसी भी संगठन की ओर से सार्वजनिक विरोध या निंदा नहीं की गई थी.
न्यायमूर्ति के करीबी सूत्रों का कहना है कि उसी अपमानजनक व्यवहार से वह आज भी आहत हैं. उनका मानना है कि जब उस समय कोई उनके सम्मान में सामने नहीं आया, तो अब सेवानिवृत्ति के दिन औपचारिक और ‘मीठी-मीठी’ बातें सुनने का कोई औचित्य नहीं है. इसी कारण उन्होंने विदाई समारोह से दूरी बनाने का फैसला किया है.
उल्लेखनीय है कि, न्यायमूर्ति की तस्वीर के साथ हुई अभद्रता की घटना पर उस समय उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया था. अदालत अवमानना के मामले में नौकरी अभ्यर्थियों को फटकार भी लगाई गई थी. तीन न्यायाधीशों की पीठ ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि विरोध प्रदर्शन में किसी न्यायाधीश की तस्वीर का इस तरह इस्तेमाल करना गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण है. बाद में अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में बिना शर्त माफी भी मांगी गई थी.
अब सेवानिवृत्ति से ठीक पहले न्यायमूर्ति विश्वजीत बसु का यह फैसला न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.———————-
(Udaipur Kiran) / ओम पराशर