
गुवाहाटी, 28 दिसंबर (Udaipur Kiran) . विदा हो रहे वर्ष 2025 में Assam में मानव–वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर चिंता का विषय बना रहा. विशेष रूप से जंगली हाथियों के हमलों और विभिन्न दुर्घटनाओं में न केवल नागरिकों की जानें गईं, बल्कि बड़ी संख्या में हाथियों की भी मौत हुई.
आंकड़ों के अनुसार, गोलाघाट और तामुलपुर जिलों में हाथियों के हमलों में कुल 17 लोगों की मौत हुई. इनमें तामुलपुर जिले में 11 और गोलाघाट जिले में छह नागरिक शामिल हैं.
गोसाईं गांव के बनगांव में 13 फरवरी को जंगली हाथी के हमले में वृद्ध महिला सत्यवती बसुमतारी की मृत्यु हो गई. इसके बाद 24 फरवरी को गोसाईंगांव में ही एक अन्य घटना में जंगली हाथी के हमले से एक किशोरी, फुंजा मुसाहारी की जान चली गई.
कामरूप जिले के पलाशबाड़ी इलाके में 16 मई को जंगली हाथी के हमले में 53 वर्षीय अशोक दास की मौत हुई. 4 अगस्त को उदालगुड़ी जिले के माजबाट क्षेत्र के बगरिबाड़ी गांव में जंगली हाथी के हमले में 42 वर्षीय लावण्य बोड़ो की मृत्यु हुई, जबकि चार अन्य लोग घायल हो गए.
वन्यजीव मृत्यु की सबसे हृदयविदारक घटना 20 दिसंबर को सामने आई, जब Assam के लामडिंग डिवीजन के अंतर्गत नगांव जिले में कामपुर–यमुनामुख रेलखंड के चांगजुराई इलाके में मिजोरम से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आकर तीन शावकों समेत सात हाथियों की मौके पर ही मौत हो गई. बाद में उपचार के दौरान एक और शावक की मौत हो गई, जिससे इस दुर्घटना में मृत हाथियों की संख्या आठ हो गई.
कोकराझार जिले के ज्वलाओ राष्ट्रीय उद्यान से सटे शेरफांगुड़ी थाना क्षेत्र के उत्तर मालीगांव में 25 दिसंबर को जंगली हाथी के हमले में डांडा नार्जारी की मृत्यु हो गई, जबकि संजीत नार्जारी गंभीर रूप से घायल हो गए.
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में Assam में मानव–हाथी संघर्ष के कारण लगभग 71 नागरिकों और 41 हाथियों की मौत दर्ज की गई, जो राज्य में वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती को दर्शाता है.
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(Udaipur Kiran) / श्रीप्रकाश