
अलीगढ़, 1 जुलाई: शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना इफरारीम हुसैन ने ज़कात फंड और वक्फ से संबंधित दानों के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप लगाया है. उन्होंने मुस्लिम चैरिटेबल संस्थानों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की, यह कहते हुए कि ज़कात और वक्फ की आय का लाभ गरीबों, अनाथों और जरूरतमंदों तक नहीं पहुँच रहा है, जिससे इस मामले में सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है.
ज़कात में कथित चोरी के सवालों के जवाब में मौलाना इफरारीम हुसैन ने कहा कि मुसलमानों से जुड़े स्रोतों जैसे मस्जिदों, मदरसों और हाजी अली तथा अजमेर शरीफ जैसे दरगाहों में काफी दुरुपयोग हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग ₹40,000 करोड़ जो गरीबों, अनाथों और जरूरतमंदों की मदद के लिए निर्धारित हैं, का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि धनवान लोग इन संसाधनों का व्यक्तिगत लाभ के लिए चोरी और लूट के माध्यम से उपयोग कर रहे हैं, और अपने नाम पर विशाल संपत्तियाँ जमा कर रहे हैं.
हुसैन ने बताया कि ज़कात की चोरी मस्जिदों में हो रही है और दरगाहों में भी ऐसी ही स्थिति है. इसका सबसे बड़ा प्रभाव गरीबों और अनाथों पर पड़ रहा है, क्योंकि उनके लिए निर्धारित धन उनके पास नहीं पहुँच रहा है. इसके परिणामस्वरूप, मुस्लिम समुदाय का एक बड़ा हिस्सा पीछे रह गया है और अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में Assamर्थ है. उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ संपत्तियों से उत्पन्न आय में भी काफी अनियमितताएँ हैं, जिसमें अनुमानित वार्षिक आय ₹50,000 करोड़ का दुरुपयोग किया जा रहा है. यदि इसका सही उपयोग किया जाए, तो यह राशि गरीबों की मदद कर सकती है और मुस्लिम समुदाय के कमजोर वर्गों के विकास में योगदान दे सकती है.
हुसैन ने आगे कहा कि उन्हें Chief Minister योगी आदित्यनाथ द्वारा राम मंदिर से संबंधित चोरी के मामलों में की गई सख्त कार्रवाई की तरह सख्त कदम उठाने की इच्छा है, जहां एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, FIR दर्ज की गई और त्वरित और कठोर कार्रवाई की गई. उन्होंने ज़कात और वक्फ से संबंधित इस महत्वपूर्ण वित्तीय मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की अपील की, यह कहते हुए कि यह बड़ी राशि समाज के सबसे कमजोर और योग्य व्यक्तियों के लाभ के लिए है.