
उदयपुर, 7 जुलाई: उदयपुर के शोभागपुरा में जे.के. सर्कल पर प्रसिद्ध आर्किटेक्ट मंडन को समर्पित ‘आर्किटेक्ट्स टॉवर’ का निर्माण मंगलवार दोपहर वेदिक अनुष्ठानों और पारंपरिक समारोहों के साथ शुरू हुआ. प्रस्तावित टॉवर लगभग 35 फीट ऊँचा होगा और इसे Indian वास्तुकला, विज्ञान और रचनात्मकता का प्रतीक माना जा रहा है. यह उदयपुर का एक नया वास्तुशिल्प स्थल बनने की परिकल्पना की गई है.
इसका आधारशिला समारोह डॉ. विनोद जसकरण पोर्वाल ट्रस्ट के प्रबंध ट्रस्टी विनोद पोर्वाल ने किया. उन्होंने परियोजना के मार्गदर्शक और आर्किटेक्ट सुनील लड्डा तथा तकनीकी सहयोगी आर्किटेक्ट प्रियंका कोठारी की उपस्थिति में निर्माण कार्य का औपचारिक उद्घाटन किया.
इस अवसर पर डॉ. पोर्वाल ने कहा कि एक समाज की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि उन रचनाकारों से भी बनती है जो उन्हें कल्पना और डिजाइन करते हैं. उन्होंने आर्किटेक्ट्स टॉवर को उन रचनात्मक मस्तिष्कों के प्रति समाज की कृतज्ञता का प्रतीक बताया, जिन्होंने अपनी कौशल से सभ्यता की प्रगति में योगदान दिया है. उन्होंने कहा कि मंडन की स्मृति में समर्पित यह परियोजना उदयपुर की सांस्कृतिक और वास्तुशिल्प धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता दिलाने में मदद करेगी.
डॉ. पोर्वाल ने आर्किटेक्ट सुनील लड्डा द्वारा विकसित किए गए विचार की सराहना की और कहा कि इतिहास, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाले विचार कालातीत बन जाते हैं और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं.
आर्किटेक्ट सुनील लड्डा ने कहा कि यह टॉवर केवल एक भौतिक संरचना नहीं होगी, बल्कि यह Indian शिल्प कौशल और आधुनिक वास्तुकला का जीवंत मिश्रण प्रस्तुत करेगा. उनके अनुसार, यह संभवतः देश का पहला सार्वजनिक स्मारक होगा जो आर्किटेक्ट्स और डिज़ाइनरों के पूरे समुदाय को समर्पित है. इस परियोजना का उद्देश्य शिल्पकारों और आर्किटेक्ट्स के योगदान को उजागर करना है जो सभ्यताओं को आकार देते हैं.
लड्डा ने बताया कि टॉवर की सबसे विशिष्ट विशेषता एक ऊर्ध्वाधर सूर्य घड़ी होगी, जो भारत के ऐतिहासिक जंतर मंतर वेधशालाओं से प्रेरित है, जहाँ समय और खगोलीय गणनाएँ पारंपरिक रूप से सूर्य की छाया की गति के माध्यम से निर्धारित की जाती थीं. उन्होंने कहा कि यह सूर्य घड़ी भारत की वैज्ञानिक धरोहर, वास्तु ज्ञान और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक होगी, जबकि यह लोगों, विशेषकर युवा पीढ़ी, को देश की ज्ञान परंपराओं से जोड़ने में मदद करेगी.
कार्यक्रम में जयदीप छाबड़ा, डॉ. सुरभि गांधी, हेमराज सिंह के साथ-साथ युवा आर्किटेक्ट्स, डिज़ाइनर्स, इंजीनियर्स और शहर के प्रमुख नागरिकों की बड़ी संख्या उपस्थित थी. प्रतिभागियों ने इस परियोजना को उदयपुर के लिए गर्व का विषय बताया और विश्वास व्यक्त किया कि एक बार पूरा होने पर आर्किटेक्ट्स टॉवर वास्तुकला, कला, विज्ञान और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर उभरेगा.