राम मंदिर दान विवाद पर उठे सवाल

लखनऊ, जुलाई 8: Uttar Pradesh के नगीना विधानसभा क्षेत्र के विधायक मनोज कुमार पारस ने राम मंदिर दान विवाद और इससे जुड़े कई मुद्दों पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि मंदिर में हाल ही में हुई चोरी की घटना ने लाखों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है और इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए.

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला लाखों भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. राम मंदिर में हुई चोरी एक गंभीर मुद्दा है, जो इसके प्रबंधन से जुड़े लोगों की विफलता को उजागर करता है. उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों ने मंदिर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन ट्रस्ट के गठन के समय उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला. खुद एक अनुसूचित समुदाय से आने के नाते, उन्होंने बताया कि दलित और पिछड़े वर्ग के कई लोग राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुए, फिर भी उन्हें ट्रस्ट में शामिल नहीं किया गया.

पारस ने कहा कि जब किसी व्यक्ति को किसी संस्था या संपत्ति का प्रबंधन सौंपा जाता है, तो वह पूरी जिम्मेदारी लेता है. इसलिए, यदि मंदिर में ऐसी घटनाएं होती हैं, तो जवाबदेही उन लोगों पर होगी जिन्हें ट्रस्ट के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था और मंदिर के प्रबंधन का कार्य सौंपा गया था.

समाजवादी पार्टी के रुख का बचाव करते हुए पारस ने कहा कि पार्टी के शब्दों और कार्यों में कोई भेद नहीं है. न तो पूर्व Chief Minister मुलायम सिंह यादव और न ही अखिलेश यादव ने कभी राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरा मामला एक न्यायालय के निर्णय से जुड़ा है, और सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करे. उन्होंने कहा कि विवादित स्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करना उस समय की सरकार का संवैधानिक दायित्व था, जिसे पूरा किया गया.

भाजपा पर निशाना साधते हुए पारस ने कहा कि जैसे-जैसे मंदिर में दान और भेंट से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं, भाजपा विपक्ष को दोषी ठहराकर जिम्मेदारी से भागने की कोशिश करती है. उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) की जांच पर चिंता जताते हुए कहा कि आमतौर पर पहले FIR दर्ज की जाती है, उसके बाद जांच होती है. लेकिन इस मामले में, SIT का गठन FIR दर्ज होने से पहले किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार अपने लाभ के लिए कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं में हेरफेर कर रही है.

पूर्व ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के पत्र के जवाब में पारस ने सवाल उठाया कि राय कब सार्वजनिक रूप से बोलेंगे, यह सुझाव देते हुए कि उन्हें वर्तमान में बयान देने से रोका गया हो सकता है और संभवतः उन्हें जांच समाप्त होने के बाद बोलने के लिए कहा जाएगा.

Uttar Pradesh की गवर्नर आनंदीबेन पटेल द्वारा प्रेम विवाह पर की गई टिप्पणियों पर पारस ने संतुलित प्रतिक्रिया दी, यह कहते हुए कि वह इस मामले पर विस्तार से नहीं जाना चाहते. उन्होंने जोर दिया कि संविधान वयस्कता की उम्र निर्धारित करता है, और सभी को उस संवैधानिक ढांचे के अनुसार कार्य करना चाहिए, इसलिए आगे की टिप्पणियाँ अनावश्यक हैं.

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