
उदयपुर, 7 अगस्त: नारायण सेवा संस्थान ने पवित्र श्रावण माह के दौरान एक शिव भक्ति कथा का आयोजन किया, जिसमें संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने राजा सागर, भगीरथ की तपस्या और गंगा के धरती पर अवतरण की कहानी सुनाई. उन्होंने कहा कि भगीरथ का जीवन धैर्य, संकल्प और जन कल्याण के लिए निस्वार्थ प्रयासों का प्रेरणादायक उदाहरण है.
सभा को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि यदि लोग व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर समाज और मानवता की भलाई के लिए समर्पित हों, तो कई असंभव कार्य संभव हो सकते हैं.
भगीरथ की तपस्या समर्पण और धैर्य को प्रेरित करती है
प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि भगीरथ ने राजा सागर के वंशजों के उद्धार के लिए कठोर तप किया. उनकी अडिग संकल्पना ने देवी गंगा के धरती पर अवतरण को संभव बनाया, जबकि भगवान शिव ने अपनी जटा में उस प्रचंड नदी को धारण किया ताकि उसके प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके.
उन्होंने कहा कि यह घटना सिखाती है कि महान लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए धैर्य, दृढ़ता और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है.
सेवा तब सार्थक होती है जब उसमें करुणा हो
भगवान शिव के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए जन सेवा और विश्व कल्याण के संदर्भ में अग्रवाल ने कहा कि समाज को ऐसी बुद्धि की आवश्यकता है जो व्यक्तियों को सही और गलत के बीच भेद करने में मदद करे, जबकि दूसरों की खुशियों और कठिनाइयों को समझे.
उन्होंने कहा कि सेवा तब ही सार्थक होती है जब यह करुणा, समर्पण और निस्वार्थ सेवा के भाव से प्रेरित हो.
लाभार्थियों के साथ संवाद
कार्यक्रम के दौरान, प्रशांत अग्रवाल ने “अपनों से अपनी बात” पहल के तहत उपचार और सेवाएं प्राप्त कर रहे विशेष रूप से सक्षम लाभार्थियों के साथ संवाद किया. उन्होंने लाभार्थियों और उनके परिवार के सदस्यों से प्रदान की गई सेवाओं के बारे में फीडबैक मांगा और आगे सुधार के लिए सुझाव आमंत्रित किए.
लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और संस्थान द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के लिए आभार व्यक्त किया. शिव भक्ति कथा में भाग लेने वाले भक्तों ने भी जन सेवा और मानवता की भलाई के लिए कार्य करने का संकल्प लिया.