किश्तवाड़ हथियार चोरी मामले में आतंकवादी सहयोगी की जमानत खारिज

जम्मू, सितंबर 2: जम्मू की विशेष एनआईए अदालत ने 2019 के हाई-प्रोफाइल किश्तवाड़ हथियार चोरी मामले में आतंकवादी सहयोगी तानवीर अहमद मलिक की जमानत खारिज कर दी है. यह मामला एनआईए केस नंबर RC 08/2019/NIA/JMU से जुड़ा है, जिसमें मार्च 2019 में हिजबुल मुजाहिदीन के सशस्त्र आतंकवादियों ने किश्तवाड़ के उप जिला आयुक्त के सुरक्षा गार्ड से एक AK-47 राइफल, तीन मैगजीन और 90 जीवित कारतूस चुराए थे. इस घटना ने जम्मू और कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की थीं और इसे आगे की जांच के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA) को सौंपा गया था.

तानवीर अहमद मलिक, जो डोडा जिले के तांतना का निवासी है, पर आतंकवादियों के लिए ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करने का आरोप है. जांच एजेंसी के अनुसार, उसने जून 2019 से जनवरी 2020 तक सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादियों को लगातार सहायता प्रदान की. एनआईए का दावा है कि मलिक ने आतंकवादियों जैसे हारून अब्बास वानी और ताहिर अहमद भट को अपने घर में शरण देकर, भोजन की व्यवस्था कर और लॉजिस्टिक समर्थन देकर मदद की, जिससे वे सुरक्षा बलों से बचते हुए अपनी गतिविधियों को जारी रख सके.

जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान, मलिक के वकील ने ट्रायल में देरी को जमानत देने का कारण बताया, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल 101 गवाहों की सूची दी है, जिनमें से 30 गवाहों के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं.

विशेष न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि गंभीर आतंकवाद के मामलों में, केवल ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं हो सकती. ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज के व्यापक हितों पर विचार करना आवश्यक है. अदालत ने यह भी कहा कि इस स्तर पर आरोपी को रिहा करना गवाहों के साथ छेड़छाड़ और सबूतों में हस्तक्षेप का कारण बन सकता है, जिससे जमानत देना अनुचित होगा.

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