हर स्थिति से सीखने की इच्छा जरूरी: प्रशांत अग्रवाल

उदयपुर, 5 सितंबर: ‘अपने से अपनी बात’ कार्यक्रम का आयोजन Saturday को नारायण सेवा संस्थान में संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल की उपस्थिति में किया गया. इस कार्यक्रम में दिव्यांगजन, मोबाइल, कंप्यूटर और सिलाई पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु, साथ ही देशभर से उपचार के लिए आए मरीज और उनके परिवार के सदस्य शामिल हुए.

गुरु-शिष्य परंपरा

प्रशांत अग्रवाल ने पारंपरिक गुरु-शिष्य संबंध को उजागर किया और भगवान कृष्ण और महारishi संदीपनि, साथ ही रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के बीच के बंधन का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला नहीं होता, बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है. वहीं, शिष्य की जिम्मेदारी होती है कि वह गुरु से प्राप्त ज्ञान, मूल्यों और मार्गदर्शन को अपने आचरण में शामिल करे.

अग्रवाल ने कहा कि सीखने की इच्छा के साथ, व्यक्ति हर किसी से, हर स्थिति से और यहां तक कि जानवरों और पक्षियों से भी कुछ सीख सकता है. उन्होंने भगवान दत्तात्रेय का उदाहरण दिया, जो 24 गुरुओं से सीखने के लिए जाने जाते हैं.

उन्होंने कहा कि सीखने के अवसर प्रकृति में और रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं में छिपे होते हैं. बस आवश्यकता है उन्हें देखना और समझना.

कर्म योग का संदेश

भगवद गीता में कर्म योग के संदेश का उल्लेख करते हुए, अग्रवाल ने कहा कि अपने कर्तव्यों का पालन करते रहना और परिणाम की इच्छा से अ attached न होना हर शिष्य द्वारा अपनाया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अपने कर्तव्यों और लक्ष्यों के प्रति ईमानदार रहना और लगातार काम करना सफलता की नींव है.

कार्यक्रम के दौरान, अग्रवाल ने प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की और उनके अनुभव, प्रशिक्षण और भविष्य की योजनाओं के बारे में जाना. उन्होंने उन्हें सीखने, अपने कौशल को निखारने और समाज के लाभ के लिए अपनी क्षमताओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया.

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