
उदयपुर, सितंबर 17: नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने चल रहे ‘अपनों से अपनी बात’ संवाद के दौरान भगवान गणेश से जुड़ी प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से नियमित भक्ति, विनम्रता, क्षमा, सेवा और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश साझा किया.
प्रशांत अग्रवाल ने भक्त मोर्या की कहानी सुनाते हुए कहा कि मोर्या ने कठिन परिस्थितियों में वर्षों तक मorgaon जाकर भगवान गणेश की पूजा की. जब वह बूढ़े हो गए और मंदिर नहीं जा सके, तो उन्हें एक सपने में संदेश मिला कि अब उन्हें आने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भगवान स्वयं उनके पास आएंगे. बाद में, उन्होंने एक नदी में भगवान गणेश की एक मूर्ति पाई.
अग्रवाल ने कहा कि भक्ति की Examination केवल पूजा में नहीं, बल्कि उसे नियमितता और अनुशासन के साथ बनाए रखने में होती है. उन्होंने कहा कि मोर्या की निष्ठा का ही परिणाम है कि आज भक्त और भगवान के नाम एक साथ याद किए जाते हैं.
शक्ति को सही दिशा की आवश्यकता
अग्रवाल ने भगवान गणेश के चूहे वाहन का उल्लेख करते हुए एक गंधर्व की कहानी सुनाई, जिसका नाम क्रौंच था. उसने एक ऋषि का अपमान किया और उसे चूहा बनने का श्राप मिला. उसके पास शक्ति थी, लेकिन सही दिशा का अभाव था.
भगवान गणेश ने उसकी शक्ति को नष्ट नहीं किया, बल्कि उसे अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया. अग्रवाल ने कहा कि किसी की क्षमताओं को दबाने के बजाय, उन्हें सही दिशा देना महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि एक महान व्यक्ति की पहचान कमजोर व्यक्ति के अनुसार समायोजित होने और साथ में आगे बढ़ने की क्षमता में होती है.
पहचान कार्य और क्षमता से आती है
अग्रवाल ने रिद्धि और सिद्धि की कहानी का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज अक्सर किसी व्यक्ति का मूल्यांकन बाहरी रूप से करता है, जबकि असली पहचान उसके कार्यों, क्षमताओं और योग्यता से निर्धारित होती है.
उन्होंने कहा कि विकलांग व्यक्तियों को भी समान सम्मान, अवसर और समर्थन मिलना चाहिए.
परशुराम और भगवान गणेश के बीच की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि परशुराम के कुल्हाड़ी के एक वार से गणेश के एक दांत टूट गया, लेकिन गणेश ने उन्हें क्षमा कर दिया. भगवान शिव के आशीर्वाद से जो कमजोरी प्रतीत होती थी, वह उनकी पहचान का हिस्सा बन गई, और उन्हें ‘एकदंत’ के नाम से जाना जाने लगा.
अग्रवाल ने कहा कि परिस्थितियों के बावजूद, लोगों को नियमितता, विनम्रता, क्षमा और करुणा को नहीं छोड़ना चाहिए.
उन्होंने कहा कि विकलांग व्यक्तियों को कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करना सच्ची सेवा है. किसी को कमजोर या अधूरा मानना उचित नहीं है; बल्कि उनकी क्षमताओं को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना चाहिए.
इस संवाद के दौरान, अग्रवाल ने विकलांग व्यक्तियों के साथ संवाद किया. कार्यक्रम में सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया.