₹122 करोड़ के न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में आठ पर चार्जशीट दाखिल

मुंबई, अक्टूबर 14: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (NICBL) से जुड़े ₹122 करोड़ के धोखाधड़ी मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई की है. एजेंसी ने मुंबई की विशेष अदालत में पूर्व महाप्रबंधक हितेश मेहता और अन्य सात व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है. अदालत ने आरोपियों को पूर्व-सूचना नोटिस जारी किए हैं.

यह जांच मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें लगभग ₹122 करोड़ की गड़बड़ी का उल्लेख था.

जांच में पता चला कि हितेश मेहता, बैंक के खातों के प्रमुख के साथ, फंड को चुराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, जिसमें उन्होंने लेखा प्रणाली में हेरफेर किया और बैंक शाखाओं के बीच नकद हस्तांतरण के झूठे रिकॉर्ड बनाए. पूछताछ के दौरान, मेहता ने लंबे समय तक फंड निकालने की बात स्वीकार की.

आगे की जांच में यह भी सामने आया कि ये गतिविधियाँ बैंक के पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्देश पर की गई थीं, जिन्होंने अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के माध्यम से बैंक के संचालन पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नियंत्रण बनाए रखा.

जांच में यह भी पता चला कि अवैध आय को कई व्यक्तियों और संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया, जिसमें मुख्य आरोपी शामिल थे, जबकि पूर्व अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को ₹26 से ₹30 करोड़ के बीच राशि प्राप्त हुई.

इसके अतिरिक्त, आरोपी हिरन भानु के संबंध में एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ, जिन्होंने कथित तौर पर कुछ बैंक उधारकर्ताओं के साथ मिलकर बिना किसी बिक्री मूल्य के विदेश में एक कंपनी और व्यावसायिक इकाई हासिल की. इसके बाद, NICBL द्वारा दिए गए बड़े ऋणों के माध्यम से इन विदेशी कंपनियों के खातों में फंड डाला गया.

पहले, ED ने आरोपियों और संदिग्धों से संबंधित ₹16.95 करोड़ की संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया था, जिसमें निश्चित जमा, बैंक बैलेंस, फ्लैट, व्यावसायिक कार्यालय और कृषि भूमि शामिल हैं. इस जब्ती की पुष्टि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत न्यायाधिकरण द्वारा की गई है.

EOW ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की है, और हिरन भानु के खिलाफ गैर-जमानती वारंट और उद्घोषणा की कार्यवाही शुरू की गई है, जो कि रिपोर्ट के अनुसार भारत के बाहर हैं और जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं.

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