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Friday, 30 October 2026
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फिर वोटर सूची में गड़बड़ी, बीरभूम में जीवित महिला को बताया गया मृत

मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल

कोलकाता, 22 दिसंबर (Udaipur Kiran) । ड्राफ्ट वोटर सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हुगली के बाद अब बीरभूम जिले के सिउड़ी से गंभीर आरोप सामने आए हैं। यहां एक जीवित महिला को ड्राफ्ट वोटर सूची में मृत बताया गया है।

सिउड़ी के विधायक विकास राय चौधरी का आरोप है कि सिउड़ी नगरपालिका के छह नंबर वार्ड की निवासी गंगा माल जीवित हैं, इसके बावजूद ड्राफ्ट वोटर सूची में उन्हें मृत दिखा दिया गया। उन्होंने कहा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। एसआईआर प्रक्रिया के जरिए योजनाबद्ध तरीके से आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की आशंका भी पैदा हो गई है।

गंगा माल की बेटी देवी मंडल ने बताया कि उनके बूथ के लिए नियुक्त बीएलओ एक बार भी उनके घर नहीं आए। उनका आरोप है कि इलाके के एक खास स्थान से गणना पत्र इकट्ठा किए गए और स्थानीय तृणमूल कार्यकर्ताओं की मदद से फॉर्म भरवाकर बाद में बीएलओ के घर जमा कर दिए गए।

देवी ने बताया कि उनकी मां की उम्र करीब 70 वर्ष है। वह शारीरिक रूप से काफी अस्वस्थ हैं और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। इसी कारण वह खुद जाकर फॉर्म जमा नहीं कर सकीं। हालांकि गणना पत्र में मां का अंगूठे का निशान था और वही फॉर्म उन्होंने खुद जमा किया था। ड्राफ्ट वोटर सूची जारी होने के बाद जब मां का नाम सूची में नहीं मिला, तब बीएलओ से संपर्क किया गया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

देवी को आशंका है कि यदि वोटर सूची से नाम हटा दिया गया तो उनकी मां वृद्धावस्था पेंशन, राशन और अन्य सरकारी योजनाओं से भी वंचित हो सकती हैं। उन्होंने जल्द से जल्द नाम सुधार की मांग की है।

इस मामले पर विधायक विकास राय चौधुरी ने कहा कि उनकी पार्टी संबंधित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि तिलपाड़ा पंचायत क्षेत्र में भी एक स्थायी निवासी को मतदाता सूची में स्थानांतरित दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि हर वैध मतदाता का नाम वोटर सूची में रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए तृणमूल कांग्रेस सभी जरूरी कदम उठाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल के बाराबनी विधानसभा क्षेत्र में भी दो बुजुर्ग जीवित होने के बावजूद चुनाव आयोग की सूची में एक को मृत और दूसरे को लापता बताया गया था। अब बीरभूम से भी इसी तरह का मामला सामने आने के बाद वोटर सूची संशोधन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

(Udaipur Kiran) / ओम पराशर

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