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Thursday, 29 October 2026
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बांग्लादेश की राजनीति खालिदा और हसीना के बीच घूमती रही है

यह पुरानी बात है... बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना (बाएं) और खालिदा जिया (दाएं) कभी दोस्त हुआ करती थीं। फोटो - इंटरनेट मीडिया

ढाका, 30 दिसंबर (Udaipur Kiran) । बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने आज सुबह ढाका के एवरकेयर अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनका राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रहा है। खालिदा जिया 1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। वह पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान की पत्नी हैं। उनके बड़े बेटे तारिक रहमान बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। बांग्लादेश की राजनीति दो महिला नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है। वो हैं अवामी लीग की शेख हसीना और बीएनपी की खालिदा जिया। दोनों कभी दोस्त रही हैं।

शेख हसीना का तख्तापलट हो चुका है। वह बांग्लादेश छोड़ चुकी हैं। 1980 के दशक में बांग्लादेश में सैन्य शासन था। तब सैन्य शासन के खिलाफ हसीना और खालिदा सड़क पर साथ-साथ आंदोलन किया करती थीं। 1990 में तानाशाह इरशाद की विदाई के बाद लोकतंत्र लौटा। 1991 में खालिदा जिया चुनाव जीतीं। इसके बाद खालिदा और शेख हसीना के बीच राजनीतिक दुश्मनी बढ़ गई। साल 1990 के बाद बांग्लादेश में जब भी चुनाव हुए सत्ता या तो खालिदा जिया के पास गई या शेख हसीना के पास। मीडिया इसे ‘बैटल ऑफ बेगम्स’ यानी दो बेगमों की लड़ाई का नाम देता रहा।

खालिदा जिया का जन्म 15 अगस्त 1945 को अविभाजित भारत के दिनाजपुर जिले के जलपाईगुड़ी में सामान्य परिवार में हुआ था। वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं थीं। 1960 में एक सैनिक जिया-उर- रहमान से उनकी शादी हुई। 1971 में बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई हुई। इस दौरान शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान गिरफ्तार कर लिए गए। इसी समय जिया-उर-रहमान ने रेडियो पर एक घोषणा पढ़ी। उन्होंने बताया कि वे ‘स्वतंत्र बांग्लादेश’ की ओर से लड़ रहे हैं। जंग खत्म होने के बाद जब बांग्लादेश बना तो रहमान वापस सेना में लौटे। उन्हें सेना में बड़ा पद मिला।

रहमान राजनीतिक रूप से भी प्रभावशाली चेहरे के रूप में देखे जाने लगे। 1975 में शेख मुजीबुर रहमान और उनके परिवार की हत्या के बाद देश में लगातार तख्तापलट होता रहा। सेना में गुटबाजी इतनी बढ़ी कि कुछ ही महीनों में कई बार सत्ता बदली। इस अस्थिर माहौल में जिया-उर-रहमान धीरे-धीरे सबसे ताकतवर सैन्य नेता बनकर उभरे और 1977 में वे देश के राष्ट्रपति बन गए। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) नाम से एक नया राजनीतिक दल बनाया। यही पार्टी आज उनके बेटे तारिक रहमान चला रहे हैं।

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(Udaipur Kiran) / मुकुंद

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