
पानीपत, 30 नवंबर (Udaipur Kiran) . पानीपत का आर्य महाविद्यालय प्रांगण sunday को श्रद्धा, संस्कृति और अध्यात्म के विराट संगम का साक्षी बना, जब जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के तीसरे दिन शहरवासियों और स्कूली बच्चों का भारी जनसमूह उमड़ पड़ा. जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित इस भव्य उत्सव ने पानीपत को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया. बांसुरी, नगाड़ों और भक्ति संगीत की गूंज ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक उल्लास से भर दिया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंचायत एवं खनन मंत्री कृष्ण लाल पंवार का उपायुक्त डॉ. विरेंदर कुमार दहिया ने स्वागत किया.
मंच पर कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि गजेन्द्र सलूजा, संत-महात्मा, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे. इस अवसर कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि गीता का संदेश किसी युग, समय या परिस्थिति का मोहताज नहीं है. यह वह प्रकाश स्तंभ है जो मानवता को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है. कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर अर्जुन को दिया गया उपदेश कालजयी है और आज की पीढ़ी यदि गीता के सिद्धांतों को आत्मसात कर ले, तो समाज और राष्ट्र प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं. उनके ये शब्द उपस्थित जनसमूह में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार कर गए. उन्होंने कहा कि गीता उपदेशों को 5 हजार वर्ष पूर्ण हो चुके हैं.
अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव, जो 2016 में आरंभ हुआ था, आज अपने 10 वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक 21 दिवसीय भव्य आयोजन जारी है. मॉरीशस, लंदन, कनाडा, यूके, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया सहित कई देशों में गीता महोत्सव आयोजित किए जा चुके हैं. इस वर्ष 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुरुक्षेत्र में आयोजित समारोह में भाग लेकर कार्यक्रम को विशिष्टता प्रदान की. उपायुक्त डॉ. विरेंदर दहिया ने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन का अद्भुत मार्गदर्शक है. निष्काम भाव से कर्म करना, कर्तव्य को सर्वोपरि रखना और निर्णयों में संतुलन बनाए रखना ही सच्चा कर्मयोग है.
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(Udaipur Kiran) / अनिल वर्मा
