केंद्रीय सरना समिति का प्रदर्शन,धर्मांतरित आदिवासियों को ‘दोहरे लाभ’ से डिलिस्ट करने की मांग

निशा भगत मुंडन करते हुए

रांची, 12 दिसंबर (Udaipur Kiran) . केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की के नेतृत्व में शुक्रवार को लोकभवन के समक्ष धर्मांतरित आदिवासियों द्वारा आरक्षण और सरकारी योजनाओं में मिल रहे ‘दोहरे लाभ’ के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत पाहन द्वारा पारंपरिक पूजा से हुई. इसी दौरान विरोध स्वरूप समिति की महिला अध्यक्ष निशा भगत ने अपना मुंडन कराया.

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि Jharkhand एक आदिवासी बहुल राज्य है, लेकिन धर्मांतरण के बाद आदिवासी पहचान से दूर हो चुके लोग अभी भी आरक्षण और विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी परंपराएं और प्रथाएं हैं, जिन्हें त्यागने वाले लोगों को आदिवासी सूची से डिलिस्ट किया जाना आवश्यक है.

सामाजिक कार्यकर्ता जय मंगल उरांव ने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम परिवार आदिवासी बेटियों से विवाह कर मायके से जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवा लेते हैं और आदिवासी समुदाय के लिए बनी योजनाओं का अनुचित लाभ उठा रहे हैं.

महिला अध्यक्ष निशा भगत ने कहा कि Jharkhand पांचवीं अनुसूची का राज्य है, फिर भी पेसा कानून अब तक लागू नहीं हो सका है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई समुदाय के धर्मांतरित लोग आदिवासी आरक्षण का लाभ लेकर मंत्री, सांसद और विधायक तक बन रहे हैं, जिससे मूल आदिवासी समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.

प्रदर्शन में संजय तिर्की, एंजेल लकड़ा, निरा टोप्पो, प्रमोद एक्का, विनय उरांव, पंचम तिर्की, सोहन कच्छप, हंदु भगत सहित कई लोग उपस्थित थे.————–

(Udaipur Kiran) / विकाश कुमार पांडे

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