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Friday, 30 October 2026
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गौ सेवा को भावनात्मक नहीं, नीतिगत और जनआंदोलन का विषय बनाया जाए : अजीत महापात्र

गौ सेवा को भावनात्मक नहीं, नीतिगत और जनआंदोलन का विषय बनाया जाए : अजीत महापात्र

जयपुर, 21 दिसंबर (Udaipur Kiran) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख अजीत महापात्र ने कहा कि वर्तमान समय में गौ सेवा को भावनात्मक नहीं, बल्कि नीतिगत, सामाजिक और व्यवहारिक आधार पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि गौ संरक्षण केवल गोशालाओं तक सीमित न रहकर घर, मंदिर, कृषि और सरकारी नीतियों से जुड़ा विषय बनना चाहिए।

महापात्र रविवार को पाथेय कण संस्थान के नारद सभागार में आयोजित श्री हस्तीमल जी स्मृति ईश्वर सृष्टि सम्मान एवं अमृतमयी गौ भारती ग्रंथ के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में गोभक्त, संत, मठ-मंदिर और गोशालाएं मौजूद हैं, इसके बावजूद देशी गोवंश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि गोशालाओं में देशी गोवंश और विदेशी नस्लों के पशुओं की स्पष्ट पहचान की जाए तथा उनके लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हों। देशी गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को प्राथमिकता देना सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि कृषि, दुग्ध उत्पादन और धार्मिक अनुष्ठानों में गौ आधारित उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। रासायनिक उर्वरकों और कृत्रिम संसाधनों के स्थान पर प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने से न केवल स्वास्थ्य बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने पंचामृत, प्रसाद और धार्मिक उपयोग में शुद्ध गौ उत्पादों की आवश्यकता पर बल दिया।महापात्र ने समाज से आह्वान किया कि गौ सेवा को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि गौ सम्मान से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार तक मांग-पत्र पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि नीतिगत स्तर पर ठोस निर्णय हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि गौ आधारित जीवनशैली अपनाने से देश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत बनेगा। उन्होंने कहा कि गौ माता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और सामाजिक संतुलन से जुड़ा आधार स्तंभ है। समाज और सरकार, दोनों को मिलकर गौ संरक्षण के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाने होंगे।

आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रदीप शेखावत ने हस्तीमल जी के जीवन के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि संघ के प्रचारक का जीवन पूर्ण समर्पण, अनुशासन और त्याग पर आधारित होता है। प्रचारक समाज के बीच रहकर स्वयं को पीछे रखता है और दूसरों को मार्गदर्शन देता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यपद्धति में प्रचारक संगठन की इच्छा और योजना को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करता है। यह जीवन व्यक्तिगत इच्छाओं के त्याग और राष्ट्रहित को सर्वोच्च मानने की भावना से जुड़ा होता है। उन्होंने सरसंघचालक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ कार्य का पहला आयाम संगठन को जीना है। प्रचारक का जीवन इसी विचारधारा का जीवंत उदाहरण है, जो समाज निर्माण और राष्ट्र सेवा में निरंतर प्रेरणा प्रदान करता है।

इस अवसर पर निम्बार्काचार्य पीठाधीश्वर श्यामशरण देवाचार्य ने कहा कि गौ माता के बिना सनातन संस्कृति और सृष्टि की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज के समय में गौ सेवा को केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अपनाने की आवश्यकता है। देवाचार्य ने कहा कि शास्त्रों के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान भी गौ आधारित उत्पादों की उपयोगिता और स्वास्थ्यवर्धक गुणों को स्वीकार कर रहा है। भारतीय गोवंश और ए-2 दुग्ध की वैश्विक मांग इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि महानगरों में रहने वाले लोग भी गौ संरक्षण, संवर्धन और जागरूकता के माध्यम से गौ सेवा में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने गौ सेवा को राष्ट्र, समाज और पर्यावरण के कल्याण से जुड़ा विषय बताते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सीकर के चंद्रमादास महाराज को श्री हस्तीमल जी स्मृति ईश्वर सृष्टि सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम के आरंभ में ईश्वर सृष्टि के अध्यक्ष कमलेश पारीक ‘कमल’ ने ईश्वर सृष्टि प्रकल्प, अमृतमयी गो भारती ग्रंथ और नंदिनी गौ सेवा संवर्धन संस्थान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। समारोह के अंत में आयोजन समिति के संयोजक पुष्कर उपाध्याय ने आभार ज्ञापित किया।

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(Udaipur Kiran) / राजीव

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