
जयपुर, 8 दिसंबर (Udaipur Kiran) . Rajasthan पुलिस के चयनित कांस्टेबलों के लिए वैज्ञानिक जांच कौशल को मजबूत करने के उद्देश्य से सेंट्रल डिटेक्टिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीडीटीआई) जयपुर में Monday को सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ.
यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) गांधीनगर ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी) के सीडीटीआई और Rajasthan एफएसएल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है. इसका मुख्य लक्ष्य अपराध स्थल प्रबंधन, फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह और वैज्ञानिक जांच कौशल को मजबूत बनाना है.
कार्यक्रम का शुभारंभ सीडीटीआई के निदेशक डॉ. अमनदीप सिंह कपूर के स्वागत एवं पाठ्यक्रम परिचय के साथ हुआ. उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध स्थल का सही संरक्षण और साक्ष्यों का वैज्ञानिक संग्रह सफल जांच की रीढ़ है.
मुख्य अतिथि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर सावंत ने कहा कि अपराध जांच में वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का उपयोग अब अनिवार्य हो चुका है. उन्होंने एक माह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रदेश में अपराध जांच की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और प्रतिभागियों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाने की प्रेरणा दी.
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि Rajasthan पुलिस अपराध जांच को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रगति कर रही है और यह प्रशिक्षण पुलिस बल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा.
उपमहानिरीक्षक पुलिस सीआईडी अपराध शाखा दीपक भार्गव ने कहा कि अपराध स्थल पर पहली प्रतिक्रिया पुलिसकर्मियों की पेशेवर दक्षता तय करती है और यह प्रशिक्षण जांच प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाएगा.
फोरेंसिक विशेषज्ञता वाले अतिथियों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी. निदेशक एसएसएल डॉ.अजय शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षित सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट अधिकारियों से साक्ष्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे मामलों की त्वरित और सटीक जांच संभव हो सकेगी.
कैंपस डायरेक्टर एनएफएसयू जयपुर डॉ. एसओ जुनारे ने फोरेंसिक शिक्षा और पुलिस प्रशिक्षण के मजबूत समन्वय को अपराध जांच के भविष्य को बदलने वाला बताया.
सीडीटीआई डायरेक्टर कपूर ने बताया कि एक माह के इस विशेष कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं को वैज्ञानिक जांच तकनीकों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा. जिनमे अपराध स्थल संरक्षण एवं दस्तावेज़ीकरण, फोटोग्राफी, फिंगरप्रिंट एवं डीएनए साक्ष्य संग्रह और डिजिटल फोरेंसिक शामिल है.
यह कोर्स बीपीआरडी और एनएफएसयू के संयुक्त प्रमाणन के साथ-साथ नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों के क्रियान्वयन में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो Rajasthan को वैज्ञानिक पुलिसिंग की अग्रणी पंक्ति में प्रवेश कराएगा.
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(Udaipur Kiran)
