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Friday, 30 October 2026
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आईआईटी रुड़की में हुआ आठवां अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन

रामायण रत्न पुरस्कार लेते स्वर्गीय महावीर अग्रवाल की पत्नी
आईआईटी रुड़की में रामायण सम्मेलन

हरिद्वार, 18 दिसंबर (Udaipur Kiran) । आईआईटी रुड़की में हुए आठवें अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन में वक्ताओं ने वर्तमान युग में रामायण, महाभारत व अन्य शास्त्रों की चरित्र-निर्माण एवं आंतरिक सुख के लिए कालातीत प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

सम्मेलन शिक्षा, सततता एवं नैतिक नेतृत्व में रामायण की प्रासंगिकता पर केंद्रित रहा। इस अवसर पर रामायण रत्न, रामचरित भवन विभूषण पुरस्कार,

रामचरित भवन रत्न पुरस्कार व रामचरित भूषण पुरस्कार प्रदान किए गए। तीन दिवसीय यह सम्मेलन आईआईटी रूड़की एवं श्री रामचरित भवन, अमेरिका ने संयुक्त रूप से आयोजित किया, जिसमें भारत एवं विदेशों से विद्वान, संत और रामायण अध्येता उपस्थित रहे।

उद्घाटन पर आईआईटी रूड़की के निदेशक प्रोफ़ेसर केके पंत ने माता-पिता के प्रति कर्तव्य, सामाजिक उत्तरदायित्व, सार्वजनिक जीवन में सत्यनिष्ठा तथा रामराज्य के आदर्श जैसे रामायण के मूल्यों को सततता, स्वास्थ्य, नैतिकता एवं राष्ट्र-निर्माण जैसे समकालीन विषयों से जोड़ा। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ज्ञान को केवल उच्च वेतन प्राप्ति का साधन न मानकर समाज की सेवा एवं विकसित भारत 2047 के निर्माण का माध्यम समझें।

महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद ने भौतिक आकांक्षाओं से प्रभुत्व वाले वर्तमान युग में रामायण, महाभारत एवं अन्य शास्त्रों की चरित्र-निर्माण एवं आंतरिक सुख के लिए कालातीत प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने रामायण को जीवन की संपूर्ण मार्गदर्शिका बताते हुए त्याग, भक्ति, गुरु-भक्ति और सामाजिक समरसता के मूल्यों पर बल दिया।

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति प्रोफ़ेसर दिनेश शास्त्री ने रामायण की पृष्ठभूमि में निहित समृद्ध संस्कृति एवं दार्शनिक परंपराओं पर प्रकाश डाला तथा भारतीय ज्ञान परंपरा ढाँचे के अंतर्गत विद्यालय से उच्च शिक्षा तक संरचित पाठ्यक्रमों में ऐसे ग्रंथों के अध्ययन की आवश्यकता की जरूरत बताई।

सम्मेलन में, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं प्रख्यात संस्कृत विद्वान प्रोफ़ेसर महावीर अग्रवाल को “रामायण रत्न” पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किया गया। डॉ. राजरानी शर्मा, प्रोफ़ेसर विनय शर्मा, श्रीमती आशा श्रीवास्तव एवं श्रीमती विनीता मिश्रा को श्री रामचरित भवन रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

डॉ. सी. कामेश्वरी, प्रोफ़ेसर रजत अग्रवाल, राम गिरीश द्विवेदी, अलका प्रमोद को श्री रामचरित भवन विभूषण पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं डॉ. मानवी गोयल, छविनाथ लाल, राकेश चौबे व स्मिता एन. लधावाला को श्री रामचरित भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

श्री रामचरित भवन के संस्थापक एवं ह्यूस्टन–डाउनटाउन विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रोफ़ेसर ओम प्रकाश गुप्ता ने 2016 में प्रारंभ हुए अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन की यात्रा का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन के पूर्व संस्करण अमेरिका, भोपाल, जयपुर एवं अहमदाबाद में आयोजित किए गए थे और यह इसका आठवाँ संस्करण है।

सभी वक्ताओं ने सामूहिक रूप से यह रेखांकित किया कि रामायण को सततता, नैतिकता एवं समकालीन चुनौतियों से जोड़ने की सम्मेलन की विषयवस्तु प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भ में पुनर्परिभाषित करने में सहायक सिद्ध होगी।

सम्मेलन में उत्कृष्ट शोध योगदान के लिए सुश्री साक्षी गोयल, डॉ. अपर्णा सिंह, राकेश चौबे एवं डॉ. राजेश कुमार मिश्र को श्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार प्रदान किए गए। सम्मेलन का संयोजन संचालन प्रोफेसर रजत अग्रवाल ने किया।

(Udaipur Kiran) / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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