उदयपुर में भावनाओं, सपनों और अंतरिक्ष की उड़ान, सरकारी स्कूल के बच्चों के नाटक ने रचा इतिहास
उदयपुर, 13 नवंबर। (Udaipur Kiran). झीलों की नगरी उदयपुर ने शनिवार शाम एक ऐसा भावनात्मक और प्रेरक क्षण सहेजा, जो लंबे समय तक स्मृतियों में जीवित रहेगा। विद्या भवन स्कूल के मुक्ताकाशी रंगमंच पर जब सरकारी स्कूल के बच्चों ने नाटक ‘गूगल कर ले रे… (Google Kar Le Re)’ प्रस्तुत किया और हाल ही में अंतरिक्ष से लौटे भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Group Captain Shubhanshu Shukla) स्वयं मंच पर उनके साथ खड़े नजर आए, तो पूरा परिसर तालियों और भावनाओं से गूंज उठा। यह सिर्फ एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि dreams, confidence और possibilities का उत्सव था।

नाटक ‘गूगल कर ले रे…’ ने आज के digital age में तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से हटकर सोचने, पढ़ने और अनुभव से सीखने की महत्ता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। पहेलियों को सुलझाने की यह यात्रा पुस्तकालय, समाज और अंततः एक अंतरिक्ष यात्री तक पहुंचती है। यही यात्रा बच्चों को यह विश्वास दिलाती है कि ज्ञान केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों में भी छिपा है।
कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों के आगमन पर क्रिएटिव सर्किल के सुनील एस. लड्ढा, डॉ. कमलेश शर्मा और हेमंत जोशी ने स्वागत किया। राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जबकि संचालन कहानीवाला रजत (Storyteller Rajat) ने किया।
सरकारी स्कूल के बच्चों की दमदार प्रस्तुति
संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केलरमानी की मौजूदगी में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय वरड़ा के विद्यार्थियों ने जिस आत्मविश्वास, सहजता और संवेदनशीलता के साथ मंच संभाला, उसने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए इन बच्चों ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को हंसाया, सोचने पर मजबूर किया और अंत में भावुक भी कर दिया। मंच पर उनकी आंखों की चमक और संवादों की सच्चाई को दर्शकों ने खुले दिल से सराहा।

शुभांशु शुक्ला की उपस्थिति ने डाली जान
नाटक का सबसे भावनात्मक और प्रेरक क्षण तब आया, जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक दृश्य के दौरान मंच पर आए। बच्चों से संवाद करते हुए उन्होंने space journey के अनुभव सरल और आत्मीय भाषा में साझा किए। बच्चों की जिज्ञासाओं का जिस अपनत्व से उन्होंने उत्तर दिया, उसने पूरे माहौल को मानवीय संवेदना से भर दिया। यह दृश्य यह संदेश देता दिखा कि बड़े सपनों की शुरुआत अक्सर छोटे मंचों से ही होती है।
ब्रह्मांड से बड़ी सोच और जिज्ञासा
कार्यक्रम के समापन पर शुभांशु शुक्ला ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मांड बड़ा है, लेकिन उससे भी बड़ी हमारी सोच और जिज्ञासा होनी चाहिए। अगर जिज्ञासा जीवित रहती है, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।
इन कलाकारों ने संभाला मंच
कहानीवाला रजत द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन टीम संस्था के सुनील टांक और सोनू परिहार (जयपुर) ने किया। सूत्रधार की भूमिका में जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. कमलेश शर्मा ने प्रस्तुति को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया। मंच पर बच्चों के साथ सुनील एस. लड्ढा, हेमंत जोशी, संदीप राठौड़, नीलोफर मुनीर और प्रियंका कोठारी की मौजूदगी ने बच्चों का उत्साह और बढ़ाया।

यही थी नाटक की विषयवस्तु
नाटक में गांव के एक सरकारी स्कूल के बच्चों को उनके शिक्षक द्वारा बिना Google की मदद से तीन पहेलियां हल करने का टास्क दिया जाता है, साथ ही दस हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा भी की जाती है। गोपू, पुनम और टीकू इन पहेलियों का हल खोजने के लिए पहले स्कूल लाइब्रेरी और फिर एक पत्रकार के पास जाते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती। इसके बाद दो आर्किटेक्ट से दो पहेलियों का हल मिलने पर तीसरी पहेली का जवाब उन्हें अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के पास मिलता है। शुक्ला न केवल अंतरिक्ष के अपने अनुभव साझा करते हैं, बल्कि पहेली का समाधान भी बताते हैं। बिना गूगल किए जवाब खोजने की यही प्रक्रिया इस नाटक की आत्मा है।
इस प्रेरणादायी आयोजन को सफल बनाने में शहर की कला संस्था क्रिएटिव सर्किल (Creative Circle) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम को आरएसएमएम, वंडर सीमेंट, नींव, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर और विद्या भवन सोसायटी का सशक्त सहयोग मिला। इन संस्थाओं के सहयोग से सरकारी स्कूल के बच्चों को ऐसा मंच मिला, जहां वे बिना किसी भेदभाव के अपनी प्रतिभा दिखा सके।
बच्चों ने पूछे कई सवाल
संवाद सत्र के दौरान बच्चों ने शुभांशु शुक्ला से अंतरिक्ष यात्रा, पृथ्वी को अंतरिक्ष से देखने के अनुभव और वहां के जीवन को लेकर कई सवाल पूछे। उन्होंने बताया कि एक अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए science subjects, अनुशासन, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास सबसे जरूरी हैं। उनका यह संवाद बच्चों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि space science के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए सपने भी दे गया।



