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Thursday, 29 October 2026
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चकोन  में  नौ दिवसीय थाती पूजन पांडव नृत्य में नजर आया उत्साह

चकोन गांव में पांडव नृत्य करते हुऐ पेशवा

उत्तरकाशी, 16 दिसंबर (Udaipur Kiran) । जिले भर में इन दिनों पांडव नृत्य की धूम है। पहाड़ी क्षेत्रों में खेती, बागवानी के काम निपटाने के बाद काश्तकार पांडव नृत्य करवाते हैं।

डुंडा ब्लॉक के ग्राम पंचायत चकोन में विगत नौ दिनों से गांव की ईष्ट देवी थात माता मंदिर में हर तीन वर्ष में होने वाली थात माता की पूजा का कल रात्रि पांच पांडवों,गांव की ईष्ट देवी नांगणी, हूण ,लाडबुडा , के सानिध्य में पूर्णाहुति के साथ आज पांडवों के द्वारा गैंडा वध के साथ समापन हुआ।

इस अवसर पर ग्राम चकोन वासियों के साथ-साथ धनारी क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोगों ने यहां पहुंच कर कर पांडवों के पश्वाओं से क्षेत्र की सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद लिया।

गांव के पंच लखन सिंह पवार, नत्थी सिंह राणा ने बताया कि थात माता की पूजा जिसमें पूर्व में पशु बलि प्रचलित थी, हमारे पूर्वजों द्वारा इसे समय के साथ सही नहीं मानते हुए इसे सैकड़ों वर्ष पूर्व समाप्त करने का निर्णय लिया था , उसी परंपरा को सभी ग्रामवासी आगे बढ़ाते हुए देवी की पूजा पाठ हवन, पूजा और नौ दिवसीय यज्ञ के रूप में इसे निरंतर जारी रखे हुए हैं। उन्होंने बताया थात की पूजा पाठ व पांडव नृत्य विशेष कर गांव व क्षेत्र की सुख समृद्धि खुशहाली के लिए हर तीन वर्ष में होती है।

इस अवसर पर स्थानीय निवासी राजेंद्र गंगाडी ने बताया नौ दिन तक चली पांडव लीला के पांडवों के जीवन पर आधारित विभिन्न घटनाओं का वृतांत नृत्य के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।पांडव नृत्य से जहां गांव में खुशी और रौनक लौट आई।

बता दें कि पाण्डव नृत्य देवभूमि उत्तराखण्ड का पारम्परिक लोकनृत्य है। पाण्डव अवतरण काल में यहा वनवास, अज्ञातवास, शिव जी की खोज में और अन्त में स्वर्गारोहण के समय आये थे। महाभारत के युद्ध के बाद पांडवों ने विध्वंसकारी अस्त्र और शस्त्रों को उत्तराखंड के लोगों को ही सौंप दिया था और उसके बाद वे स्वार्गारोहिणी के लिए निकल पड़े थे, इसलिए अभी भी यहां के अनेक गांवों में उनके अस्त्र- शस्त्रों की पूजा होती है और पाण्डव लीला का आयोजन होता है ।

(Udaipur Kiran) / चिरंजीव सेमवाल

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