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Friday, 30 October 2026
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ठाणे सिविल में गंभीर रूप से जख्मी युवती के जबड़े की मुफ्त सर्जरी

Successful jaw surgery for young women
Successful jaw surgery for young women

मुंबई,25 दिसंबर ( हि.स.) । ठाणे जिले में नवी मुंबई क्षेत्र के नेरल इलाके में एक एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल एक युवती की ठाणे सिविल हॉस्पिटल में टूटे जबड़े के लिए बहुत रिस्की मैक्सिलोफेशियल (चेहरे के जबड़े) सर्जरी हुई। हालांकि वह प्राइवेट हॉस्पिटल का भारी खर्च नहीं उठा सकती थी, लेकिन सिविल में इलाज ने उसे नई ज़िंदगी दी।

पूजा (बदला हुआ नाम) को टू-व्हीलर चलाते समय एक एक्सीडेंट में सिर और जबड़े में गंभीर चोट लगी थी। एक्सीडेंट इतना गंभीर था कि पूजा का जबड़ा टूट गया था, एक-दो दांत टूट गए थे और वह अपना मुंह भी नहीं खोल पा रही थी। हालांकि, इस एक्सीडेंट के बाद जो असली लड़ाई शुरू हुई, वह थी इलाज।

क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज का खर्च परिवार की पहुंच से बाहर था, पूजा का परिवार सचमुच मुश्किल में था। ‘जबकि परिवार अभी भी इलाज के बारे में चिंता कर रहा था, उन्हें बताया गया कि ठाणे सिविल हॉस्पिटल में सही और अच्छी क्वालिटी का इलाज दिया जाएगा, और परिवार को बहुत राहत मिली।

पूजा को तुरंत ठाणे जिला सर्जन डॉ. कैलाश पवार और एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े की देखरेख में ठाणे सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उस समय उसकी हालत बहुत क्रिटिकल थी। सीनियर सर्जन डॉ. निशिकांत रोकड़े, डेंटल सर्जन डॉ. अर्चना पवार, डॉ. ओमकार भोसले और दूसरे एक्सपर्ट्स ने तुरंत उसकी जांच की। सीटी स्कैन और एमआरआई रिपोर्ट के बाद यह साफ हो गया कि यह सर्जरी बहुत जोखिम भरी थी।

गंभीर स्थिति को देखते हुए मुंबई के नायर हॉस्पिटल से मैक्सिलोफेशियल डॉ. कार्तिक पुंजा को इस मुश्किल फेशियल सर्जरी के लिए बुलाया गया। चार घंटे तक चली इस मुश्किल सर्जरी में, टूटे हुए जबड़े की हड्डी की जगह नई हड्डी लगाई गई। यह सर्जरी न सिर्फ मेडिकल स्किल, बल्कि इंसानी सेंसिटिविटी का भी टेस्ट थी।आज यह युवती धीरे धीरे सामान्य स्थिति में आ रही है।

बताया जाता है कि इसके लिए मैक्सिलोफेशियल डॉ. कार्तिक पूजा, डॉ. निशिकांत रोकड़े, डॉ. ओमकार भोसले, डॉ. रूपाली यादव, डॉ. अर्चना पवार, डॉ. संकेत शिंदे वगैरह ने बहुत मेहनत की।

ठाणे सिविल अस्पताल के सर्जन डॉक्टर कैलाश पवार कहते हैं कि “मरीज़ गरीब है या अमीर, यह हमारे लिए कभी कोई मुद्दा नहीं है। अगर समय पर इलाज मिल जाए, तो जान बच जाती है। यही ठाणे सिविल की सच्ची भावना है।”

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(Udaipur Kiran) / रवीन्द्र शर्मा

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