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Thursday, 29 October 2026
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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी सरकार बनाएगी सख्त कानून, निगरानी को गठित होगी समिति

हेली सेवा का वर्चुअल शुभारंभ करते मुख्यमंत्री धामी।

मुख्यमंत्री ने यूकेएसएसएससी परीक्षा के पेपरलीक मामले की सीबीआई जांच के लिए किया अनुमोदन

देहरादून, 2 अक्टूबर (Udaipur Kiran News) । उत्तराखंड में अब प्रतियोगी परीक्षाओं में भी नकल रोकने के लिए सख्त कानून तैयार करने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने परीक्षा पर पैनी नजर रखने के लिए एक समिति के गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस अलावा मुख्यमंत्री ने यूकेएसएसएससी की 21 सितंबर को हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा की सीबीआई जांच के लिए भी अनुमोदन कर दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ ही आयोजित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के मन में किसी भी प्रकार की शंका या संदेह नहीं रहना चाहिए, इसीलिए राज्य सरकार ने मामले को राज्य की एजेंसियों तक सीमित रखने के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का निर्णय लिया है। सीबीआई जांच से पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी परीक्षाओं में नकल रोकने के ठोस तैयारियों में जुटे हैं। इस संबंध में वे लगातार विशेषज्ञों से भी रायशुमारी कर रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं को स्वच्छ व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक समिति के गठन का निर्णय लिया है। समिति प्रतियोगी परीक्षाओं की कड़ी निगरानी करेगी।

खालिद ने नौ परीक्षाओं में किए आवेदन, पांच के नहीं दिए पेपर

नकल विरोधी कानून के तहत पंजीकृत अभियोग की विवेचना कर रही एसआईटी टीम ने विवेचना के दौरान आरोपित खालिद के घर का सर्च वारंट लेकर उसके घर की तलाशी ली गयी। तलाशी के दौरान पुलिस टीम को आरोपि के घर से प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की पठन सामग्री (किताबें इत्यादि) बरामद नहीं हुईं। विवेचना के दौरान प्रकाश में आया कि आरोपित खालिद ने वर्ष 2023 से 2025 तक कुल नौ प्रतियोगी परिक्षाओं के आवेदन किये गये थे, जिनमें से पांच प्रतियोगी परीक्षाओं में आरोपित सम्मिलित नहीं हुआ था। जिन परीक्षाओं के उसने पेपर दिए थे, उनमें भी उसके प्राप्तांक काफी कम थे। आरोपित ने जिन परीक्षाओं के लिए आवेदन किया गया, उनमें से कुछ परीक्षाएं ऐसी भी थी जिनकी शैक्षिक अहर्ताओं को आरोपित पूर्ण नहीं करता था। एसआईटी इस परिप्रेक्ष्य में भी विवेचना कर रही है, कि उक्त परीक्षाओं के लिए आवेदन के पीछे आरोपित की मंशा क्या थी।

(Udaipur Kiran) / विनोद पोखरियाल

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