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Friday, 30 October 2026
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दांतन–नारायणगढ़ में पराली जलाने से फसलों का भारी नुकसान, प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद जारी लापरवाही

पराली बुझाते ग्रामीण पश्चिम मेदिनीपुर
पराली बुझाते ग्रामीण पश्चिम मेदिनीपुर
पराली बुझाते ग्रामीण पश्चिम मेदिनीपुर

पश्चिम मेदिनीपुर, 05 दिसंबर (Udaipur Kiran) । जिले के दांतन और नारायणगढ़ क्षेत्र में पराली (खेत में बचा फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं ने बड़ी समस्या का रूप ले लिया है। धान कटाई का मौसम तेज़ी पर है और मशीनों से कटाई के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में पराली बच रहा है। स्थानीय प्रशासन की सख्त मनाही और निरंतर चेतावनी के बावजूद कई किसान इस पराली में आग लगा रहे हैं, जिसके चलते आसपास के खेतों में लगी फसल भी जलकर राख हो रही है। पिछले एक सप्ताह में जिले के कई जगहों पर बड़े पैमाने पर फसल जलने की घटनाएं सामने आई हैं। शुक्रवार को भी ऐसी घटना देखी गई।

बुधवार को दांतन–II ब्लॉक के बागगेड़िया क्षेत्र में पराली जलाने की वजह से कई बीघा धान की फसल पल भर में राख हो गई। शुक्रवार सुबह खाकुड़दा इलाके में किसानों ने एक खेत में धधकती आग देख पुलिस को सूचना दी। सूचना पाकर बेलदा थाना एवं जोरागेड़िया फाड़ी की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ स्थानीय किसान भी जुट गए और आग पर काबू पाने में सफल हुए।

किसानों का कहना है कि थोड़ी-सी लापरवाही से कई महीनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। किसने आग लगाई पुलिस इसकी जांच कर रही है।

प्रशासनिक प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आने से स्थानीय किसान और ग्रामीण समाज में चिंता बढ़ रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पराली जलाने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता कम होती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन जागरूकता के अभाव में यह प्रथा ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी जारी है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन सख्त कदमों के साथ-साथ वैकल्पिक समाधान जैसे पराली प्रबंधन और मशीनरी उपलब्धता पर ध्यान दे, ताकि किसानों को खेत जलाने की आवश्यकता ही न पड़े। —————

(Udaipur Kiran) / अभिमन्यु गुप्ता

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