
हकृवि में ‘मधुमक्खियों एवं स्वदेशी परागणकों की जीव विज्ञान, पालन एवं प्रबंधन’ विषय पर प्रशिक्षण
संपन्न
हिसार, 10 दिसंबर (Udaipur Kiran) . Haryana कृषि विश्वविद्यालय में ‘मधुमक्खियों एवं
स्वदेशी परागणकों की जीव विज्ञान, पालन एवं प्रबंधन’ विषय पर 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम
(सीएएफटी) का समापन हुआ. इस प्रशिक्षण में देश के विभिन्न नौ राज्यों के प्रतिभागियों
ने भाग लिया. समापन समारोह में विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग मुख्य
अतिथि रहे.
डॉ. राजबीर गर्ग ने इस अवसर कहा कि हमारे देश में मधुमक्खी पालन की अपार संभावनाएं
हैं, क्योंकि लगभग 70 प्रतिशत पुष्प संसाधन अभी भी उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि देश में 120 मिलियन मधुमक्खी कालोनियां स्थापित करने की क्षमता है.
मधुमक्खी पालन के लिए वर्तमान में 3.5 मिलियन कालोनियां ही उपलब्ध हैं, जो परागण आवश्यकताओं
की दृष्टि से अत्यंत कम है. उन्होंने बताया कि परागण से प्राप्त अप्रत्यक्ष लाभ, शहद
और मोम के मूल्य से 10 से 15 गुना अधिक होते हैं. उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान
करते हुए कहा कि वे यहां अर्जित ज्ञान का उपयोग वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन,
परागणक संरक्षण तथा किसानों की आय में बढ़ोतरी करने में लगाएं. उन्होंने प्रतिभागियों
को प्रमाण पत्र भी वितरित किए.
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा
ने प्रतिभागियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन के व्यवसाय को
अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करें ताकि उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो सके. कीट विज्ञान
विभाग की अध्यक्षा एवं कोर्स निदेशक डॉ. सुनीता यादव ने केंद्र द्वारा संचालित की जा
रही विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने
बताया कि विभाग द्वारा अब तक 38 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें देश
के विभिन्न राज्यों से लगभग 678 प्राध्यापक, कीट विज्ञान के सामयिक विषयों में प्रशिक्षण
प्राप्त कर चुके हैं. समापन अवसर पर प्रशिक्षण संयोजक डॉ. दीपिका कलकल, डॉ मनोज कुमार
जाट, डा. विजय कुमार मिश्रा तथा विभाग के सभी कीट वैज्ञानिक उपस्थित रहे.
(Udaipur Kiran) / राजेश्वर
