उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती में राजा स्वरूप में श्रृंगार, आज शाम निकलेगी भव्य शाही सवारी
उज्जैन, 18 अगस्त (Kiran News)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को भादो मास की कृष्ण पक्ष दशमी तिथि पर भगवान महाकाल का भस्म आरती के दौरान विशेष श्रृंगार किया गया। जलाभिषेक और पंचामृत पूजन के बाद जटाधारी भगवान महाकाल को भांग, रजत चंद्र मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर राजा स्वरूप में सजाया गया। इस भव्य श्रृंगार के दौरान पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” की गूंज सुनाई दी और हजारों भक्तों ने दिव्य दर्शन का लाभ लिया।

सुबह 4 बजे मंदिर के पट खोले गए। पुजारियों ने गर्भगृह में देव प्रतिमाओं का पूजन, जलाभिषेक और पंचामृत अर्पित किया। भांग-चंदन और त्रिपुंड से भगवान का मस्तक सजाया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई। रजत मुकुट, रजत मुण्डमाल, रुद्राक्ष और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। अंत में भगवान को फल व मिष्ठान का भोग लगाया गया।
शाम को निकलेगी भव्य शाही सवारी
आज शाम उज्जैन में भगवान महाकाल की छठवीं एवं अंतिम राजसी (शाही) सवारी भव्यता के साथ निकाली जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई गणमान्य शामिल होंगे। 10 ड्रोन से रजत पालकी पर पुष्पवर्षा होगी। सात किलोमीटर लंबे मार्ग में अवंतिकानाथ नगर भ्रमण कर अपनी प्रजा का हाल जानेंगे।
सवारी में भगवान महाकाल छह स्वरूपों—रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, गजराज पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश, श्री होल्कर स्टेट मुखारविंद और श्री सप्तधान मुखारविंद डोल रथ पर—में भक्तों को दर्शन देंगे। सवारी के साथ जनजातीय कलाकारों द्वारा ढुलिया जनजातीय गुदुमबाजा, श्रृंगारी लोक, डंडा और बैगा जनजातीय करमा नृत्य प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
सुरक्षा और व्यवस्था
मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, सवारी शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरेगी। रजत पालकी को सशस्त्र बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। 70 भजन मंडलियां, साधु-संत, पुलिस बल, नगर सेना और पुजारी सवारी के साथ रहेंगे। सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य विभागों की गाड़ियां भी शामिल रहेंगी।
इस भव्य आयोजन में उज्जैन समेत मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से श्रद्धालु, भजन मंडलियां और कलाकार भाग ले रहे हैं। हर वर्ष की तरह महाकाल की शाही सवारी पूरे शहर में आस्था और उल्लास का प्रतीक बनी हुई है।



