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Thursday, 29 October 2026
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काली पूजा से पहले कोलकाता की हवा ‘खराब’, प्रदूषण स्तर 238 तक पहुंचा

कोलकाता, 20 अक्टूबर (Udaipur Kiran News) । काली पूजा से पहले कोलकाता की हवा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। शहर के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी वायु प्रदूषण का स्तर ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया।

पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ स्थानों पर एक्यूआई सूचकांक 178 से ऊपर यानी ‘मध्यम’ श्रेणी में रहा, जबकि अन्य इलाकों में यह स्तर 101 से 150 के बीच में दर्ज किया गया।

विक्टोरिया मेमोरियल क्षेत्र में रविवार रात आठ बजे सूचकांक का स्तर 238 दर्ज हुआ। बालीगंज में 155, चेतला में 158, जादवपुर में 186 और माणिकतला में 171 रहा। ये सभी स्तर पर्यावरण मानकों के अनुसार “खराब” माने जाते हैं। वहीं, बिधाननगर में 105, फोर्ट विलियम में 134 और पार्क स्ट्रीट क्षेत्र में 149 का स्तर रिकॉर्ड किया गया।

पर्यावरणविद सोमेन्द्र मोहन घोष ने चेतावनी दी कि “संवेदनशील समूहों में तुरंत स्वास्थ्य प्रभाव दिख सकते हैं, जबकि सामान्य लोग भी सांस लेने में कठिनाई और गले में जलन महसूस कर सकते हैं।”

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी ने बताया, “दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और शुष्क मौसम के कारण हवा में सूक्ष्म कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। अभी त्योहार शुरू नहीं हुआ है, इसलिए हरे पटाखों का उपयोग बेहद सीमित है। फिर भी पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें सतर्क हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है।”

18 अक्टूबर को जादवपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 242 और उत्तर कोलकाता स्थित रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय केंद्र पर 252 दर्ज हुआ था, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। 17 अक्टूबर को यही स्तर 179 से 185 के बीच था।

घोष ने बताया, “रात बढ़ने के साथ शहर के अलग-अलग हिस्सों से पटाखे फूटने की खबरें आने लगी हैं। मुझे आशंका है कि आज रात और कल यानी 20 अक्टूबर को सूचकांक ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकता है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘खराब’ वायु (201 से 300 के बीच) लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस संबंधी दिक्कतें पैदा करती है, जबकि ‘बहुत खराब’ वायु (301 से 400 के बीच) लंबे समय तक रहने पर श्वसन रोगों का कारण बन सकती है। ‘गंभीर’ वायु (401 से 500 के बीच) स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित करती है और बीमार व्यक्तियों के लिए बेहद हानिकारक होती है।

(Udaipur Kiran) / ओम पराशर

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