गढ़वाली-कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं को एआई युग से जोड़ने के लिए भाषा डेटा कलेक्शन पोर्टल का शुभारंभ

लॉन्च का शुभारंभ Uttarakhand के Chief Minister  पुष्कर सिंह धामी के वीडियो संदेश के माध्यम से

देहरादून, 31 अक्टूबर (Udaipur Kiran) . देवभूमि Uttarakhand की लोकभाषाओं- गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया. इस अवसर पर “भाषा डेटा कलेक्शन पोर्टल का भव्य शुभारंभ अमेरिका के सिएटल और कनाडा के सरे-वैंकूवर में किया गया.

इस ऐतिहासिक पोर्टल का शुभारंभ Uttarakhand के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी के वीडियो संदेश के माध्यम से हुआ. Chief Minister ने इस पहल को “Uttarakhand की सांस्कृतिक अस्मिता को डिजिटल युग से जोड़ने वाला युगांतकारी प्रयास” बताया और अमेरिका एवं कनाडा में रहने वाले Uttarakhandी प्रवासियों को शुभकामनाएं दी.

Chief Minister ने अपने संदेश में कहा, “जब तक हमारी भाषा जीवित है, हमारी संस्कृति जीवित है. Uttarakhand सरकार सदैव अपनी मातृभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए तत्पर है और इस ऐतिहासिक पहल में पूर्ण सहयोग करेगी.”

इस पोर्टल के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाओं के लगभग 10 लाख (1 मिलियन) शब्द, वाक्य, कहावतें, और कहानियां एकत्र की जाएंगी, ताकि एआई प्लेटफ़ॉर्म इनसे सीखकर भविष्य में हमारी भाषाओं में संवाद कर सकें.

यह ऐतिहासिक कार्यक्रम में लगभग 4000 से अधिक प्रवासी Uttarakhandी भाई-बहन उपस्थित रहे.

पद्म प्रीतम भारतवाण ने कर्णप्रयाग (बद्रीनाथ क्षेत्र) से ऑनलाइन जुड़कर अपने संदेश में कहा, “जब तक हमारी भाषा जीवित है, हमारी संस्कृति और हमारी पहचान जीवित है. भाषा बचेगी तो संस्कार भी बचेंगे.” उन्होंने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए अपनी जागर एवं ढोल सागर अकादमी की ओर से निरंतर सहयोग देने की घोषणा की.

सचिदानंद सेमवाल ने कहा, “यह केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि हमारी जड़ों से जुड़ने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखने का एक जन-आंदोलन है. मेरे 20 वर्षों से अधिक के इंजीनियरिंग अनुभव और 4 वर्षों से अधिक के एआई अनुभव का उपयोग यदि अपनी मातृभाषा के संरक्षण में हो रहा है, तो इससे बड़ा सौभाग्य मेरे जीवन के लिए और क्या होगा. इस पहल को हम एक सामाजिक आंदोलन के रूप में चलाएंगे और जो भी इसमें जुड़ना चाहेगा उसका स्वागत है. चाहे वह इंजीनियर हो, भाषा विशेषज्ञ, लोक कलाकार, समाजसेवी या व्यवसायी.”

देवभूमि Uttarakhand सांस्कृतिक सोसायटी कनाडा के अध्यक्ष बिशन खंडूरी ने कहा, “यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि इस ऐतिहासिक लॉन्च की मेजबानी का अवसर हमारी संस्था को मिला. यह पहल विदेशों में रह रहे सभी Uttarakhandियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखेगा.”

कार्यक्रम के दौरान सोसाइटी की ओर से बताया गया कि कनाडा और अमेरिका में “एआई सक्षम भाषा शिक्षण केंद्र” स्थापित किए जाएंगे, जहां प्रवासी बच्चे आधुनिक तकनीक की सहायता से गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी भाषाएं सीख सकेंगे. ये केंद्र पद्म प्रीतम भारतवाण जी की जागर अकादमी से संबद्ध रहेंगे.

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(Udaipur Kiran) / राजेश कुमार

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