
लखनऊ, 13 नवंबर (Udaipur Kiran) . 21वीं सदी की डिजिटल दुनिया में बच्चों की रचनात्मकता नए आयाम छू रही है. Uttar Pradesh की नन्ही ब्लॉगर अक्षिता (पाखी) इसका उदाहरण हैं, जिन्हें मात्र 4 वर्ष 8 माह की आयु में वर्ष 2011 में भारत सरकार के ‘राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन्हें ब्लॉगिंग और कला के क्षेत्र में अद्भुत योगदान के लिए तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में प्रदान किया था.
आज़मगढ़ निवासी व कानपुर में जन्मी अक्षिता के पिता कृष्ण कुमार यादव भारत सरकार में पोस्टमास्टर जनरल हैं, जबकि मां आकांक्षा यादव प्रवक्ता एवं साहित्यकार हैं. अक्षिता का ब्लॉग ‘पाखी की दुनिया’ (https://pakhi-akshita.blogspot.com/) 2009 में शुरू हुआ और जल्द ही लोकप्रियता हासिल कर लिया.
अक्षिता को नेपाल और श्रीलंका में हुए अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर सम्मेलनों में भी सम्मानित किया गया. उनकी कविताएं व चित्र अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. वर्तमान में दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययनरत अक्षिता का लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनना है.
अक्षिता सामाजिक कार्यों, पर्यावरण संरक्षण और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान से भी जुड़ी हैं. नन्ही उम्र में मिली यह सफलता साबित करती है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती.
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(Udaipur Kiran) / Harsh Gautam
