हिमाचल में मॉनसून का कहर: कुल्लू में बादल फटा, मंडी-शिमला में भारी नुकसान, स्कूल बंद

शिमला, 19 अगस्त (Udaipur Kiran). हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मॉनसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं. राजधानी शिमला के नवबहार से राजभवन की ओर रामचंद्रा चौक के पास Monday देर रात भारी भूस्खलन हुआ. मलबा और पेड़ सड़क पर गिरने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया. आसपास के तीन से चार भवन भूस्खलन की चपेट में आ गए. प्रशासन ने सतर्कता बरतते हुए इन भवनों को खाली करवाकर करीब 35 से 40 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया. ये भवन अलग-अलग विभागों के सरकारी आवास थे.

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इसी तरह, मंडी जिले की पधर उपमंडल की चौहारघाटी में बीती रात और आज सुबह हुई भारी बारिश से भारी तबाही हुई है. शिल्हबुधाणी और तरस्वाण पंचायतों में 6 फुट ब्रिज, एक वाहन, एक दुकान और सैकड़ों बीघा निजी भूमि तेज बहाव में बह गई. राहत की बात यह रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ. प्रधानों ने बताया कि नालों में उफान के कारण लोग सुरक्षित स्थानों पर चले गए. सैकड़ों बीघा भूमि बहने से किसानों और बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है.

एसडीएम पधर सुरजीत सिंह समेत लोक निर्माण और राजस्व विभाग की टीमें मौके पर भेज दी गई हैं. स्थिति को देखते हुए पधर उपमंडल के शिक्षण संस्थानों में आज अवकाश घोषित कर दिया गया है.

कुल्लू जिले की लगघाटी में मंगलवार सुबह बादल फटने से दो दुकानों और एक बाइक को नुकसान पहुंचा है. सरवरी क्षेत्र में एक पैदल पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया. प्रशासन ने राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं. हालात को देखते हुए कुल्लू और बंजार उपमंडल के सभी शिक्षण संस्थान आज बंद किए गए हैं.

कांगड़ा जिले में पौंग डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है. मंगलवार सुबह 8 बजे तक डैम का जलस्तर 1383.02 फुट दर्ज किया गया. बीबीएमबी प्रशासन के अनुसार सभी छह टर्बाइनें चालू हैं, जिनसे 17,456 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि स्पिलवे गेट्स से 42,379 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ. इस तरह कुल 59,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. बुधवार से यह मात्रा बढ़ाकर 75 हजार क्यूसेक की जाएगी. निचले क्षेत्रों के प्रशासन को अलर्ट किया गया है और लोगों से नदी किनारों से दूर रहने की अपील की गई है.

मौसम विभाग ने राज्य में 25 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. लगातार बारिश के चलते भूस्खलन, बादल फटने और नदियों-नालों में बाढ़ का खतरा बरकरार है.

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