
मोदी के विज़न पर देवदीपावली पर सजेगी ‘दिव्य और हरित काशी’
लखनऊ, 4 नवंबर (Udaipur Kiran) . आस्था और अद्भुत दृश्य का संगम बुधवार को काशी में एक बार फिर देखने को मिलेगा. देवों की दीवाली यानी देवदीपावली के अवसर पर बुधवार, 5 नवंबर को पूरे वाराणसी के घाट दीपों की पंक्तियों से जगमगा उठेंगे. कार्यक्रम का शुभारंभ सभी घाटों पर दीप प्रज्जवलन से शाम 5.15 से 5.50 बजे तक होगा. इसके बाद प्रमुख घाटों- नमो घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट और अस्सी घाट पर विशेष गंगा आरती शाम 6.00 से 6.50 बजे तक संपन्न होगी. आरती के दौरान पूरे घाट क्षेत्र में मंत्रोच्चारण, घंटों की गूंज और दीपों की झिलमिलाहट से एक दिव्य वातावरण बनेगा. इस दौरान काशी के 97 प्रमुख कुण्डों पर जलाए जाएंगे 2 लाख दीप जलाये जायेंगे. यह जानकारी पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मंगलवार काे दी.
ग्रीन आतिशबाजी होगी आकर्षण का प्रमुख केंद्रमंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि चेत सिंह घाट पर दर्शकों के लिए तीन चरणों में प्रोजेक्शन एवं लेजर शो प्रस्तुत किए जाएंगे. पहला शो शाम 6.15 से 6.45 बजे, दूसरा 7.15 से 7.45 बजे और तीसरा शो 8.15 से 8.45 बजे तक चलेगा. यह शो काशी की पौराणिकता, अध्यात्म और संस्कृति को प्रकाश, ध्वनि और 3डी प्रभावों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रदर्शित करेगा.
मंत्री ने बताया कि ललिता घाट के सामने रेती पर शाम 8.00 से 8.15 तक होने वाली ग्रीन आतिशबाजी इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण रहेगी. पर्यावरण के अनुकूल इस आतिशबाजी में हानिकारक रसायनों का प्रयोग नहीं होगा, जिससे प्रदूषण न के बराबर रहेगा. गंगा तट पर हरियाली, स्वच्छता और ‘हरित काशी’ का संदेश देते रंगों की बरसात इस कार्यक्रम को खास बनाएगी.
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि “देवदीपावली काशी की आत्मा और आस्था का उत्सव है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Chief Minister योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आज काशी अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वैभव के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी उदाहरण बन रही है. इस वर्ष देवदीपावली में ग्रीन आतिशबाजी, लेजर शो और दीप प्रज्जवलन के माध्यम से हम पारंपरिक आस्था को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि श्रद्धालु इस पावन पर्व पर न केवल दिव्यता का अनुभव करें, बल्कि ‘स्वच्छ, हरित और विश्व स्तर की काशी’ के संदेश को भी महसूस करें. प्रधानमंत्री और Chief Minister की दृष्टि यही है कि काशी सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैश्विक पर्यटन और संस्कृति का केंद्र बने और यह देवदीपावली उसी दिशा में एक प्रेरक कदम है.————
(Udaipur Kiran) / बृजनंदन
