श्रीमद् भागवत में केवल सत्य को प्रतिपादित किया गया : आचार्य व्योम त्रिपाठी

श्रीमद् भागवत सप्ताह भक्ति ज्ञान यज्ञ महोत्सव में कथा का श्रवण कराते आचार्य व्योम त्रिपाठी.

मुरादाबाद, 12 दिसम्बर (Udaipur Kiran) . रामगंगा विहार स्थित सांई गार्डन में शुक्रवार को श्रीमद् भागवत सप्ताह भक्ति ज्ञान यज्ञ महोत्सव के दूसरे दिन मंगलाचरण, भीष्म स्तुति, राजा परीक्षित जन्म की कथा सम्पन्न हुई. कथाव्यास आचार्य व्योम त्रिपाठी ने प्रवचन करते हुए कहा कि मंगलाचरण अति आवश्यक है. जिनका मंगल आचरण हो उन्ही का मंगलाचरण होता है और श्रीमद् भागवत में केवल सत्य को प्रतिपादित किया गया है. सिर्फ सत्य की वंदना की गई है.

आचार्य व्योम त्रिपाठी ने भागवत कथा के अद्वितीय वक्ता शुकदेव महाराज के जन्म कर्म की कथा सुनाई. नारद जी द्वारा वेद व्यास के क्षोभ को दूर करने के लिए अपने पूर्व जन्म की कथा सुनाई एवं अद्वितीय श्रोता परीक्षित महाराज के जन्म की कथा श्रवण कराई कि किस प्रकार भगवान ने परीक्षित महाराज के प्राणों की रक्षा की. कुंती स्तुति और भीष्म स्तुति की पावन कथा का श्रवण लाभ उपस्थित भक्तों ने प्राप्त किया. राजा परीक्षित ने कलियुग पर दया की और कलयुग के प्रभाव में उन्होंने ऋषि के गले में मृत सर्प डाला. जिसकी वजह से उनको सात दिन में सर्प दंश के कारण मृत्यु का श्राप मिला. उनकी मृत्यु को मंगलमय बनाने के लिए सभी ऋषि मुनियों की उपस्थिति में शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित पर कृपा की और उनको भागवत कथा सुनने गंगा तट पहुंचे. कथा विश्राम के समय सभी भक्तों को विदुरजी के पावन चरित्र की कथा का लाभ मिला कि कैसे भगवान ने दुर्योधन के 56 भोगों को छोड़कर प्रेम के वश विदुरजी के यहां केले के छिलके खाए.

इस मौके पर विनोद गुप्ता, मीनू गुप्ता, चिराग गुप्ता, चेरी गुप्ता, डॉ शशि अरोड़ा, अशोक अरोड़ा, निमित जायसवाल, नलिन गुप्ता, प्राची गुप्ता, संगीता गुप्ता, गिरीश गुप्ता, गीता, ज्योति, संगीता, शालिनी, रेखा आदि उपस्थित रहे.

(Udaipur Kiran) / निमित कुमार जायसवाल

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