हिमाचल में 23 से भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, 366 सड़कें और दो नेशनल हाईवे ठप
शिमला, 20 अगस्त (Kiran News)। हिमाचल प्रदेश में मॉनसून का कहर जारी है और आगामी दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 23 से 25 अगस्त तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार, इस दौरान गरज-चमक, तेज़ आंधी और भूस्खलन की घटनाओं की संभावना अधिक रहेगी। 21 अगस्त को मौसम खराब रहने की संभावना है, जबकि 22 अगस्त को ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में येलो अलर्ट रहेगा। 23 अगस्त को चंबा, कुल्लू, शिमला व सोलन में येलो अलर्ट और कांगड़ा, मंडी व सिरमौर में भारी वर्षा का ऑरेंज अलर्ट रहेगा। 24 अगस्त को चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन में येलो अलर्ट तथा सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

बीते 24 घंटों में प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। ऊना के भरवाईं में 70 मिमी, देहरा गोपीपुर, पालमपुर, सोलन और गुलेर में 60-60 मिमी, बिलासपुर में 50, शिमला के जुब्बड़हट्टी में 50, नैना देवी में 50 और नादौन में 40 मिमी वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण राज्य में जनजीवन प्रभावित हुआ है। भूस्खलन की घटनाओं से कई सड़कें बंद हो गई हैं और यातायात बाधित है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, बुधवार शाम तक प्रदेश में दो नेशनल हाईवे और 366 सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं। अकेले मंडी जिले में 174, कुल्लू में 125, कांगड़ा में 21 और शिमला में 22 सड़कें बंद हैं। एनएच-305 कुल्लू और एनएच-154 मंडी में पूरी तरह बाधित हैं। लगातार बारिश के कारण मंडी जिले में चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे भी हणोगी के पास भूस्खलन के कारण बंद पड़ा है। प्रशासन द्वारा मलबा हटाने का काम जारी है, लेकिन वैकल्पिक मार्ग भी कन्नौज के पास धंसने से स्थिति और गंभीर बनी हुई है। कुल्लू की ओर जाने वाला मार्ग खोलने में अभी समय लग सकता है।
भारी बारिश का असर बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी पड़ा है। प्रदेश में 929 ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 529 ऊना, 281 कुल्लू और 98 मंडी जिले में हैं। 139 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं, जिनमें मंडी की 60 और कुल्लू की 56 योजनाएं शामिल हैं।
अब तक के मानसून सीजन में प्रदेश को भारी नुकसान हुआ है। इस बरसात में अब तक 280 लोगों की मौत, 37 लोग लापता और 342 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में मंडी में 48, कांगड़ा में 47, चंबा में 35, शिमला में 26, किन्नौर में 25 और कुल्लू में 24 लोग शामिल हैं। इस अवधि में 2,791 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें 635 पूरी तरह ढह गए। 385 दुकानें और 2,527 पशुशालाएं नष्ट हुईं। बारिश और भूस्खलन से 1,803 पशु और 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक प्रदेश को 2,281 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 1,264 करोड़ और जलशक्ति विभाग को 753 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
इस बीच कुल्लू जिले के पीज गांव में तड़के बादल फटने की घटना हुई। शास्त्री नगर नाले में जलस्तर बढ़ने से फ्लैश फ्लड आ गई और नाले में खड़ी कई गाड़ियां बह गईं, कुछ घरों में मलबा घुस गया। राहत की बात रही कि किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ। ऊना जिले के अंब और गगरेट उपमंडलों व कुल्लू के मनाली उपमंडल में भारी बारिश व खराब मौसम के चलते बुधवार को सभी शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।
कांगड़ा जिले में लगातार वर्षा और पौंग डैम से छोड़े गए पानी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। बीबीएमबी के अनुसार 20 अगस्त की सुबह पौंग डैम का जलस्तर 1383.13 फुट दर्ज किया गया, जिसके बाद पानी छोड़ा गया। इससे ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ गया है और फतेहपुर व इंदौरा उपमंडल के निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।



