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Thursday, 29 October 2026
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लैब सहायक भर्ती में याची का रिजल्ट अविलम्ब घोषित करने और नियुक्ति के आदेश पारित

jodhpur

जोधपुर, 29 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । राजस्थान उच्च न्यायालय ने राज्य के चिकित्सा विभाग द्वारा बारबार अन्याय व उत्पीड़न के गंभीर मामले पर आज लैब सहायक भर्ती-2018 में याचिकाकर्ता का रिजल्ट अविलम्ब घोषित करने व नियुक्ति देने के दिये आदेश पारित किए। एक ही अनुभव अवधि को कंसीडर करवाने के लिए तीसरी बार रिट याचिका लगाई लगाई थी। कोर्ट ने बिना कारण नियुक्ति रोकना मनमाना और अन्यायपूर्ण होना बताया। सात साल की लंबी प्रतीक्षा बाद याचिकाकर्ता को न्याय मिला। दो माह के भीतर समस्त नोशनल परिलाभ सहित नियुक्ति दिए जाने अहम आदेश दिए गए। अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने पैरवी की। राजस्थान हाइकोर्ट वरिष्ठ जस्टिस सुश्री रेखा बोराणा की एकलपीठ से मिली राहत मिली है।

पण्डित जी की ढाणी, ओसियां ज़िला जोधपुर निवासी करनी सिंह उदावत की ओर से अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने बताया कि याचिकाकर्ता 01 अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2012 तक लैब तकनीशियन पद पर ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, ओसियां के अधीन कार्यरत रहा है, जिसके कार्य अनुभव को सीएमएचओ, जोधपुर द्वारा निर्धारित फॉरमेट में जारी नहीं करने पर लैब सहायक भर्ती-2013 चयन प्रक्रिया में याचिकाकर्ता को कंसीडर नहीं किया गया। जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुई पहली रिट याचिका को हाइकोर्ट एकलपीठ ने निर्णय 10 अक्टूबर 2017 से स्वीकार करते हुए निर्धारित फॉरमेट में अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए। उक्त भर्ती में मेरिट में नहीं आने से याचिकाकर्ता का चयन नहीं हुआ। फ़िर चिकित्सा विभाग, राजस्थान सरकार ने लैब सहायक भर्ती-2018 निकाली। जिसमे बोनस अंक देने के लिए जारी होने वाले अनुभव प्रमाण पत्र का फॉरमेट बदल दिया गया, जिस पर याचिकाकर्ता ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जोधपुर कार्यालय में उसी कार्य अवधि का अनुभव प्रमाण पत्र नए फॉरमेट में जारी करने हेतु निवेदन किया, लेकिन सीएमएचओ जोधपुर ने जारी करने से इन्कार कर दिया, जिसपर याचिकाकर्ता ने पुन: वर्ष 2018 में दूसरी रिट याचिका पेश की, जिसमे हाइकोर्ट एकलपीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए नये फॉरमेट में अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने और चयन प्रक्रिया में आगे सम्मलित करने के आदेश दिए।

अंतरिम आदेश की पालना में अनुभव प्रमाण पत्र तो जारी कर दिया गया लेकिन उसे यह कहते हुए कंसीडर करने से मना कर दिया गया कि अनुभव प्रमाण पत्र विज्ञप्ति की अंतिम तिथि (30 जून 2018) के बाद जारी किया गया।। चिकित्सा विभाग का उक्त रुख़/ उत्तर बड़ा आश्चर्यजनक था क्योंकि एक तरफ अन्तिम निर्धारित तिथि तक निर्धारित फॉरमेट में अनुभव प्रमाण पत्र जानबूझकर जारी नहीं किया गया और हाइकोर्ट के अंतरिम आदेश की पालना में अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के बाद यह कहना कि अनुभव प्रमाण पत्र देरीना और विज्ञप्ति की अंतिम निर्धारित तिथि के बाद जारी किया गया, इसलिए स्वीकार्य नहीं है, बहुत ही विचित्र और हास्यास्पद कथन है। जिसपर उसी अनुभव अवधि को कंसीडर करवाने के लिए वर्ष 2022 में याचिकाकर्ता को मज़बूरन तीसरी रिट याचिका दायर करनी पड़ी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ख़िलेरी ने बताया कि चिकित्सा विभाग, राजस्थान सरकार के अधिकारी किस तरह निष्ठुरता, मनमानी, मनमर्जी एवं असंवेदनशील बर्ताव का परिचय देते हैं, उसका यह जीता-जगता उद्धहरण हैं, जिसमे एक ही कार्य अनुभव अवधि (01.04.2011 से 31.03.2012) को कंसीडर करवाने के लिए एक ही आशार्थी को चौथी बार (एक अवमानना याचिका और तीन रिट याचिकाये) उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा है, ऐसे में भारी कोस्ट सहित रिट याचिकाओ को स्वीकार करने की गुहार लगाई गई।।तीसरी रिट याचिका में हाइकोर्ट ने पुन: अंतरिम आदेश दिनाँक 05 फ़रवरी 2022 पारित करते हुए अनुभव को कंसीडर करने और 10 बोनस अंक मिलने के बाद मेरिट में आने पर उसे आगे की चयन प्रक्रिया में सम्मलित करने का आदेश दिया। बावजूद इसके, चिकित्सा विभाग के अधिकारियों का कृत्य जस का तस रहा और याचिकाकर्ता का रिजल्ट घोषित करने से रोक दिया गया और अन्य कनिष्ठ अभ्यर्थियों को दिनाँक 05.08.2022 से नियमित नियुक्तियां दे दी गई। जबकि याचिकाकर्ता चिकित्सा विभाग के हठधर्मिता औऱ असंवेदनशीलता की वजह से मेरिट में आने के बावजूद नियुक्ति से महरूम है।।

याची के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए और रिकॉर्ड का परिशीलन पश्चात हाइकोर्ट जस्टिस सुश्री रेखा बोराणा की एकलपीठ ने दोनो रिट याचिकाये स्वीकार करते हुए चिकित्सा विभाग को आदेश दिए कि याचिकाकर्ता का रिजल्ट तुरन्त प्रभाव से घोषित करें औऱ मेरिटनुसार उसे समस्त पारिणामिक परिलाभ व सीनियोरिटी सहित दो माह के भीतर भीतर लैब सहायक पद पर नियुक्ति देवे।

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(Udaipur Kiran) / सतीश

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