राजस्थान हाईकोर्ट : सेवानिवृति के समय जन्म तिथि में संशोधन करवाना अनुचित

jodhpur

Rajasthan पशु एवं पशुपालन विश्वविद्यालय, बीकानेर का मामला

जोधपुर, 1 दिसंबर (Udaipur Kiran) . Rajasthan उच्च न्यायालय जोधपुर एकल पीठ के न्यायाधीश मुनरी लक्ष्मण ने लच्छीराम नामक वाहन चालक द्वारा जन्म दिनांक में संशोधन कराने संबंधित रिट याचिका को खारिज करते हुए उसके द्वारा सेवानिवृति से पहले जन्म दिनांक में संशोधन करने को नामंजूर किया.

लच्छीराम वर्तमान में वाहन चालक के पद पर Rajasthan पशु एवं पशुपालन विश्वविद्यालय बीकानेर के तहत वल्लभ नगर, उदयपुर में कार्यरत है. उसकी नियुक्ति दिनांक 17 मई 1988 को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुई थी. उसकी नियुक्ति उसके द्वारा प्रस्तुत स्कूल के व अन्य दस्तावेज के आधार पर दी गई थी. उसके द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेजों में उसकी जन्म दिनांक 18 मई 1964 थी और पशु विश्वविद्यालय द्वारा उसकी नियुक्ति दिनांक 18 मई 1964 के आधार पर ही की गयी व वर्ष 2013 में उसे वाहन चालक के पद पर पदोन्नति दी गयी वो भी उसकी जन्म दिनांक 18 मई 1964 के आधार पर ही दी गयी.

Rajasthan पशु एवं पशुपालन विश्वविद्यालय (राजूवास) के द्वारा उसकी जो वरिष्ठता सूची जारी की गयी उसमें भी उसकी जन्म दिनांक 18 मई 1964 ही थी. वर्ष 2021 में उसके द्वारा एक प्रार्थना पत्र पशु विश्वविद्यालय में इस बाबत् प्रस्तुत किया गया कि उसकी जन्म तिथि 18 मई 1964 के स्थान पर 18 मई 1969 है तथा इसके समर्थन में उसने एक डुप्लीकेट स्थानांतरण प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत किया गया. पशु विश्वविद्यालय द्वारा उसका डुप्लीकेट स्थानांतरण प्रमाण पत्र को अवैध मानते हुए उसकी जन्म दिनांक 18 मई 1964 मानते हुए उसे 31 मई 2024 से सेवानिवृत करने का आदेश दिनांक 04 नवम्बर 2023 पारित किया.

लच्छी राम द्वारा उसके सेवानिवृति आदेश दिनांक 04.11.2023 को उच्च न्यायालय के समक्ष इस आधार पर चुनौती दी कि उसके जन्म दिनांक में त्रुटि है उसका स्थानांतरण प्रमाण पत्र जो नियुक्ति के समय प्रस्तुत किया गया वह सही ना होकर वर्ष 2021 में डुप्लीकेट प्रमाण पत्र दिया गया है वह सही है तथा इसी के अनुसार उसकी जन्म दिनांक 18 मई 1964 के स्थान पर 18 मई 1969 पढ़ा जावे व उसकी के अनुसार उसकी सेवानिवृति की जाये.

पशु विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा ने उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 1988 में हुई व उसके द्वारा उस समय जो दस्तावेज प्रस्तुत किये गये वो सही आधार मानकर नियुक्ति प्रदान की गयी व उन्हीं के आधार पर उसको पदोन्नति प्रदान की गयी व वरिष्ठता सूची उसी आधार पर जारी की गयी. इसके अलावा उसका जो वाहन चलाने का लाईसेंस, आधार कार्ड व पहचान पत्र सभी में उसकी जन्म तिथि 18 मई 1964 है व अब वर्ष 2021 में यानि नियुक्ति से 33 वर्ष बाद यह कहना कि उसकी नियुक्ति के समय दिये गये दस्तावेज में जन्म दिनांक 18 मई 1964 के स्थान पर 18 मई1969 है सर्वथा अनुचित व विधि विरूद्ध है.

पशु विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का यह भी तर्क था कि जब कर्मचारी सेवानिवृति के करीब है तब उसके द्वारा अपने जन्म तिथि में संशोधन कराना अनुचित है उसे यह संशोधन नियुक्ति के समय कराया जाना था, ना कि सेवानिवृति के समय. कर्मचारी की नियुक्ति भी उसके द्वारा प्रस्तुत किये गये दस्तावेजों के आधार पर ही दी गयी ना कि किसी अन्य दस्तावेज के आधार पर.

पशु विश्वविद्यालय के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए लच्छी राम द्वारा प्रस्तुत रिट याचिका को खारिज किया व उसके द्वारा सेवानिवृति के समय अपने जन्म तिथि में संशोधन कराने को अवैध व अनुचित माना.

(Udaipur Kiran) / सतीश

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