
राजगढ़, 12 दिसम्बर (Udaipur Kiran) . Madhya Pradesh के राजगढ़ पदस्थ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जितेन्द्रकुमार शर्मा की कोर्ट ने फैसले में तलाक दिए बिना दूसरी महिला से विवाह करने के मामले में आरोपित को दो वर्ष का कठोर कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है. प्रकरण में अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भी भुगतना होगा.
प्रकरण में डीपीओ आलोक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में शासन की ओर पैरवी कर रही सहायक जिला अभियोजन अधिकारी सोनिया शर्मा ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि 25 फरवरी 2020 को राजगढ़ में रिपोर्ट दर्ज कराई की वर्ष 2012 में उसका विवाह रामबाबू से रीति-रिवाज से हुआ था, जिससे छह साल की पुत्री है. लगभग दो साल पहले आरोपित ने उससे दो लाख रुपए व वाहन की मांग की, जिसकी शिकायत राजगढ़ में की और फरियादी अपने मायके में रहने लगी.
फरियादी को सूचना मिली कि आरोपित रामबाबू ने उसे तलाक दिए बिना दूसरी महिला से विवाह कर लिया, जानकारी लेने पर ससुराल की वोटर लिस्ट दूसरी पत्नी का नाम दर्ज होना पाया गया, जिसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई. 4 फरवरी को न्यायालय के बाहर मिले आरोपित से दूसरे विवाह के संबंध में पूछा तो आरोपित ने अश्लील गालियां दी और कहा कि मैने दूसरी शादी कर ली है, जो करना है कर लेना साथ ही धमकी दी गई. पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 294, 494, 506 के तहत प्रकरण दर्ज किया. विचारण के दौरान न्यायालय ने आरोपित रामबाबू को दो साल का कठोर कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया. डीपीओ श्रीवास्तव ने बताया कि यह एक अनोखा प्रकरण है. सामान्यतःपति-पत्नी के जीवनकाल में उनके द्वारा दूसरा विवाह करने के प्रकरण में सजा मिलने की संभावनाएं कम होती है. दस्तावेजी साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत वोटर लिस्ट और जन्म प्रमाण-पत्र से भी यह प्रमाणित हो रहा था कि अभियुक्त द्वारा बिना तलाक दिए दूसरी शादी की गई है.
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(Udaipur Kiran) / मनोज पाठक
