

उत्तरकाशी, 6 दिसंबर (Udaipur Kiran) . ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यमुना के शीतकालीन वास खरशाली गांव में शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ किया. इस मौके पर उन्होंने देश-विदेश के लोगों को खरसाली में यमुना जी के दर्शन करने का न्योता दिया. आज उत्तरकाशी पहुंचने पर शंकराचार्य का लोगों ने स्वागत किया. वे कल मुखवा गांव में गंगा जी के दर्शन करेंगे.
उत्तरकाशी पहुंचने पर उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि Uttarakhand सदियों से देवभूमि और संत-महात्माओं की तपस्थली रही है. उन्होंने कहा कि चारधामों में प्राचीन परंपरा अनुसार छह महीने देवता स्वयं पूजा स्वीकार करते हैं और छह महीने मानव द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि धामों में कपाट बंद होने के बाद पूजा बंद होने की जो गलत धारणा लोगों में बनी है, वह सही नहीं है.
शीतकालीन पूजा स्थलों में भी उन्हीं देवताओं की विधिवत पूजा होती है, और यहां दर्शन करने से ग्रीष्मकालीन धामों के समान ही पुण्य फल प्राप्त होता है. शंकराचार्य ने कहा कि शीतकालीन यात्रा का उद्देश्य लोगों में यह संदेश पहुंचाना है कि धार्मिक परंपराओं एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पूजा स्थलों का परिवर्तन अनादिकाल से होता आया है . इस मौके पर काशी विश्वनाथ के पूजारी महंत जयेंद्र पुरी , गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल, बृजेश सती, पालिकाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान, स्वामी चेतन, राम गोपाल पैन्यूली, आचार्य महामाया प्रसाद, हरि सिंह राणा, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र मटूडा, बॉबी पंवार, छात्र संघ अध्यक्ष विनय चौहान, आदि मौजूद रहे है. मंच का संचालन शैलेन्द्र नौटियाल ने किया है.
(Udaipur Kiran) / चिरंजीव सेमवाल
