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Thursday, 29 October 2026
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मगराहाट में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक पर हमले को लेकर शुभेंदु अधिकारी का तीखा हमला, ममता सरकार पर लोकतंत्र कुचलने का आरोप

Suvendu

कोलकाता, 29 दिसंबर (Udaipur Kiran) ।

दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट में चुनाव आयोग के विशेष मतदाता सूची पर्यवेक्षक सी मुरुगन पर हुए हमले को लेकर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला है। सोमवार शाम शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया के जरिए इस घटना को ममता बनर्जी के शासन में आतंक का एक और शर्मनाक अध्याय बताया है।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सी मुरुगन पर ड्यूटी के दौरान तृणमूल कांग्रेस के लोगों की भीड़ ने हमला किया और उन्हें घेरकर अपमानित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला किसी एक अधिकारी पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद रखने वाले हर मतदाता पर सीधा हमला है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में पश्चिम बंगाल एक ऐसे जंगल में बदल गया है, जहां संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे अधिकारियों को शिकार की तरह निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं, बल्कि सुनियोजित हमला था, जिसे स्थानीय स्तर के तृणमूल नेताओं ने अंजाम दिलवाया। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जिला परिषद सदस्य मुजीबर जैसे नेताओं की भूमिका भीड़ को इकट्ठा करने में रही।

शुभेंदु अधिकारी ने मगराहाट का जिक्र करते हुए कहा कि यही वही इलाका है, जहां साल 2020 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के काफिले पर भी हमला किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।

नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे सवाल करते हुए कहा कि अगर आयोग अपने ही अधिकारियों को सुरक्षा देने में असमर्थ है, जो मैदान में जाकर संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तो फिर पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे कराए जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के कट्टर तत्व खुलेआम घूम रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती दे रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से सख्त हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि भविष्य में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर इस तरह के हमले दोहराए न जाएं।

(Udaipur Kiran) / ओम पराशर

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