दिल्ली एपीएमएस को पूर्ण रूप से लागू करने वाली देश की पहली विधानसभा बनी: विजेंद्र गुप्ता

दिल्ली विधानसभा में Monday को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता

– एपीएमएस पोर्टल पर प्रदर्शित आंकड़ों की समीक्षा करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने व्यक्त की चिंता

New Delhi, 8 दिसंबर (Udaipur Kiran) . दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने Monday को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्टों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा कि दिल्ली वास्तविक-समय डिजिटल ऑडिट मॉनिटरिंग पोर्टल (एपीएमएस) को पूर्ण रूप से लागू करने वाली देश की पहली विधानसभा बनी है.

गुप्ता ने कहा कि ऑडिट पैरा मॉनिटरिंग सिस्टम का अंगीकरण पारदर्शिता, प्रक्रियागत अनुशासन तथा जवाबदेह ऑडिट फॉलो-अप की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने पोर्टल पर प्रदर्शित आंकड़ों की समीक्षा करते हुए चिंता व्यक्त की कि विभिन्न विभागों द्वारा 142 ऑडिट पैराग्राफ़ अपलोड किए गए थे, जबकि केवल 30 एक्शन टेकन नोट्स (एटीएनएस) प्रस्तुत किए गए थे.

उन्होंने कहा कि ऐसी लंबित स्थिति उचित नहीं है और सार्वजनिक लेखा समिति (पीएसी) को प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए समयबद्ध एवं पूर्ण प्रतिक्रियाएं अनिवार्य है.

बैठक में सार्वजनिक लेखा समिति के अध्यक्ष अजय महावर, सरकारी उपक्रम समिति के अध्यक्ष गजेन्दर द्राल, भारत सरकार के महालेखाधिकारी (ऑडिट) अमनदीप छथा, वित्त सचिव शुर्भीर सिंह, वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा निदेशालय ऑडिट के अधिकारी उपस्थित रहे.

बैठक में एपीएमएस की कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें बताया गया कि पोर्टल किस प्रकार ऑडिट पैराग्राफ के प्रत्येक चरण को दर्ज करता है, ऑडिट कार्यालय की टिप्पणियां, विभागीय उत्तर, विलंब की स्थिति तथा अनुपालन को वास्तविक-समय में दर्शाता है.

एपीएमएस एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे वित्त मंत्रालय, व्यय विभाग द्वारा विकसित तथा नियंत्रक जनरल ऑफ अकाउंट्स द्वारा सार्वजनिक लेखा समिति के दिशानिर्देशों के आधार पर संकल्पित किया गया है. यह प्रणाली ऑडिट पैराग्राफ, एक्शन टेकन नोट्स और एक्शन टेकन रिप्लाईज की एंड-टू-एंड मॉनिटरिंग सक्षम बनाती है. इसमें मूल ऑडिट टिप्पणी, पहचानी गई कमियां, प्रत्येक चरण की टिप्पणियां, विभागीय उत्तर, उत्तरों की स्वीकृति/वापसी तथा अंतिम निस्तारण की समय-सीमा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती है. पूर्व में यह प्रणाली आंशिक रूप से ही उपयोग में थी, परंतु अब एकीकृत रूप से दिल्ली विधानसभा के लिए पूरी तरह संचालित है और एक पारदर्शी, ट्रेस करने योग्य ऑडिट प्रक्रिया उपलब्ध कराती है.

बैठक में ऑडिट फॉलो-अप की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई. यह सामने आया कि कई विभागों द्वारा अपलोड किए गए उत्तर निर्धारित प्रारूप में नहीं थे, जिसके कारण उन्हें सार्वजनिक लेखा समिति के समक्ष नहीं रखा जा सका. कई उत्तरों पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं थे, कुछ में ऑडिट टिप्पणियों का उत्तर नहीं था और कुछ उत्तर ऑडिट अवलोकनों से मेल नहीं खाते थे.

गुप्ता ने कहा कि इस प्रकार की कमियां ऑडिट प्रक्रिया को कमजोर करती हैं और समिति द्वारा विषयों की सार्थक Examination में अनावश्यक देरी उत्पन्न करती हैं.

अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि अधूरे या अनौपचारिक उत्तरों को मान्य एटीएन नहीं माना जाएगा और उन्हें सुधार हेतु वापस किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सभी विभाग तीन सप्ताह के भीतर सही प्रारूप में, विधिवत हस्ताक्षरित और ऑडिट टिप्पणियों का समाधान प्रस्तुत करने वाले एक्शन टेकन नोट्स जमा करें. उन्होंने विधानसभा सचिवालय को निर्देश दिया कि उत्तरों का मानक प्रारूप, हस्ताक्षर प्राधिकारी तथा टिप्पणियों के उत्तर देने की प्रक्रिया संबंधी एक समान दिशानिर्देश सभी विभागों को भेजे जाएँ.

अध्यक्ष ने यह भी निर्देश दिया कि एपीएमएस का व्यापक प्रदर्शन (डेमो) आयोजित किया जाए, ताकि सभी स्तरों पर अधिकारी पोर्टल की सुविधाओं से भली-भांति परिचित हों और प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ सकें. उन्होंने कहा कि उपयुक्त प्रशिक्षण, निर्धारित प्रारूप का पालन और समयबद्ध प्रतिक्रिया सार्वजनिक लेखा समिति की प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए अत्यंत आवश्यक है.

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि एपीएमएस का उद्देश्य ऑडिट निरीक्षण को आधुनिक बनाना, मैनुअल फाइल मूवमेंट को कम करना तथा दिल्ली सरकार के वित्तीय जवाबदेही ढांचे को मजबूत करना है. उन्होंने उल्लेख किया कि इस वर्ष कई लंबित कैग रिपोर्टें सदन में प्रस्तुत की गई हैं और आगामी पीएसी बैठकों से पूर्व विभागीय कार्यवाही समय पर पूर्ण होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि एपीएमएस ऑडिट चक्र में स्पष्टता, संरचना और अनुशासन लाता है तथा अनुपालन की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय करता है.

बैठक का समापन करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली विधानसभा ऑडिट सुशासन में सुधार, संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने और जनता के विश्वास को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि एपीएमएस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रशासनिक सुधार का महत्वपूर्ण कदम हैं, जहां पारदर्शिता एक निरंतर और विश्वसनीय प्रक्रिया के रूप में सुनिश्चित होती है. प्रत्येक ऑडिट टिप्पणी पर समयबद्ध, उत्तरदायी और सत्यापित कार्रवाई संभव हो पाती है.

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(Udaipur Kiran) / धीरेन्द्र यादव

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